Cyber Crime News: पटना पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह का संचालन कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि एक बीटेक डिग्रीधारी युवक अपनी पत्नी और साले के साथ मिलकर कर रहा था. पुलिस के अनुसार तीनों ने मिलकर करीब 400 लोगों को ठगी का शिकार बनाया और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की.
यह कार्रवाई साइबर अपराध समाधान इकाई और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने की है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नालंदा जिले के बिहारशरीफ निवासी गौरव राज, उसकी पत्नी सपना कुमारी और कंकड़बाग निवासी निखिल कुमार के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक गौरव बीटेक की पढ़ाई कर चुका है, जबकि उसकी पत्नी और साला स्नातक पास हैं. तीनों पिछले करीब दो वर्षों से साइबर ठगी के इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे.
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
साइबर थाना के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर लगातार ठगी की शिकायतें मिल रही थीं. जांच के दौरान कई मामलों में एक ही तरह का तरीका सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की.
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को गिरोह के पटना में सक्रिय होने की जानकारी मिली. इसके बाद नवनीत नगर, रानीपुर मेहंदीगंज और कंकड़बाग इलाके में एक साथ छापेमारी की गई. कार्रवाई के दौरान तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
किराए के मकान से चल रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि रानीपुर मेहंदीगंज स्थित एक किराए के मकान से साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था. यहीं से लोगों को फोन किए जाते थे और उन्हें विभिन्न तरह के झांसे देकर ठगी का शिकार बनाया जाता था.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पांच सिम कार्ड, तीन आधार कार्ड और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए हैं. बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है.
बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे खुद को बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे. इसके बाद लोन मंजूर कराने, क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने, पुरस्कार अंक दिलाने और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों की गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे.
जैसे ही पीड़ित अपने बैंक खाते और अन्य जरूरी जानकारी साझा करते थे, आरोपी उनके खातों से रकम निकाल लेते थे. कई मामलों में लोगों को यह पता तक नहीं चलता था कि उनके साथ ठगी हो चुकी है.
लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिले
पुलिस जांच में आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है. अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह केवल बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में सक्रिय था और करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे चुका है.
अब तक की जांच में करीब 400 लोगों के ठगी का शिकार होने की बात सामने आई है. हालांकि पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.
फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी
जांच के दौरान दो अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है. पुलिस का कहना है कि यही दोनों आरोपी पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालक हैं और फिलहाल फरार चल रहे हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
पुलिस ने जब्त मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को वैज्ञानिक जांच के लिए भेज दिया है. अधिकारियों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस गिरोह से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
फिलहाल बीटेक इंजीनियर, उसकी पत्नी और साले की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस साइबर ठगी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में जुटी हुई है.