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02-Feb-2026 02:42 PM
By First Bihar
Patna Airport : पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों के संचालन को और सुरक्षित व आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लंबे समय से जमीन की कमी के कारण अटका रडार इंस्टॉलेशन प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ने जा रहा है। जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रशासन को रडार स्थापना के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर एक-एक एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है, जिससे पटना एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेशन की राह लगभग साफ हो गई है।
जिला प्रशासन की ओर से जिन दो भूखंडों की पहचान की गई है, उनमें एक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की जमीन शामिल है। इस जमीन को जल्द ही औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर एयरपोर्ट प्रशासन को हस्तांतरित किया जाएगा। इसके अलावा बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की एक एकड़ जमीन भी एयरपोर्ट को दी जाएगी। यह जमीन बिहार राज्य पथ विकास निगम के कार्यालय के पीछे स्थित है, जहां पहले मॉल निर्माण की योजना प्रस्तावित थी। हालांकि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एयरपोर्ट प्रशासन ने इस पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद इस जमीन को रडार प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त माना गया।
गौरतलब है कि फिलहाल पटना एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन विजुअल और नेविगेशन सिस्टम के सहारे किया जा रहा है। यहां से प्रतिदिन लगभग 45 जोड़ी विमानों की आवाजाही होती है। हाल के वर्षों में करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक नया टर्मिनल भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन रडार की अनुपस्थिति के कारण उड़ानों की संख्या और समय-सारिणी सीमित बनी हुई है। खासकर खराब मौसम, कोहरे और कम दृश्यता के दौरान विमानों के संचालन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, रडार लगने के बाद एक ही रनवे पर अधिक विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ संभव हो सकेगी। रडार से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रियल टाइम डेटा मिलेगा, जिससे विमान की सटीक लोकेशन, गति और आपसी दूरी पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे न केवल सुरक्षा स्तर बढ़ेगा, बल्कि उड़ानों में देरी और रद्द होने की समस्या में भी कमी आएगी।
अधिकारियों का कहना है कि रडार स्थापित होने के बाद पटना एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन सुचारु रूप से किया जा सकेगा। अभी तक तकनीकी सीमाओं के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेशन को लेकर कई अड़चनें थीं, जिन्हें रडार के जरिए काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। कागजी कार्रवाई, तकनीकी मंजूरी और इंस्टॉलेशन को मिलाकर रडार लगाने में करीब छह महीने का समय लग सकता है।
बिहार के अन्य हवाई अड्डों की बात करें तो दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट पर एयरफोर्स बेस के तहत रडार की सुविधा पहले से मौजूद है, जबकि गया एयरपोर्ट पर अब तक रडार नहीं लगाया गया है। ऐसे में पटना एयरपोर्ट पर रडार की स्थापना राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।