Bihar News : राजधानी पटना के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए उच्च शिक्षा अब और अधिक सुलभ होने जा रही है। जिला प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के सात प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, जिससे हजारों छात्रों को अपने घर के आसपास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार अथमलगोला, बेलछी, दनियावां, घोसवरी, खुशरूपुर, मनेर और संपतचक प्रखंडों में आगामी 1 जुलाई से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से इन क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पटना शहर या अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और आर्थिक संसाधनों दोनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से इस समस्या का काफी हद तक समाधान होने की उम्मीद है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती चरण में इन कॉलेजों का संचालन अस्थायी भवनों से किया जाएगा। इसके लिए उपयुक्त भवनों का चयन लगभग पूरा कर लिया गया है। चयनित परिसरों में छात्रों की सुविधा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें आधुनिक फर्नीचर, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट एवं वाईफाई सुविधा, स्वच्छ पेयजल, आरओ सिस्टम तथा साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था शामिल है।
हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी होगी। प्रशासन की योजना प्रत्येक कॉलेज के लिए स्थायी परिसर विकसित करने की है। इसके लिए संबंधित प्रखंडों में जमीन की पहचान और चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज निर्माण के लिए कम से कम पांच एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में ढाई एकड़ जमीन पर्याप्त मानी गई है। जिला प्रशासन ने 30 जून तक भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने संबंधित अधिकारियों, प्राचार्यों और विभागीय प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में कॉलेज संचालन से जुड़ी सभी तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया गया। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि विभिन्न विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें और छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में कॉलेज खुलने से बड़ी संख्या में लड़कियों को लाभ मिलेगा। कई बार दूरी और परिवहन की समस्याओं के कारण छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, लेकिन अब उन्हें अपने क्षेत्र में ही स्नातक की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। इस पहल का फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को भी मिलेगा। शहरों में पढ़ाई के लिए किराया, परिवहन और अन्य खर्चों का बोझ कम होगा, जिससे अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा की ओर आकर्षित होंगे।
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी की विशेष व्यवस्था भी की है। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शुभम कुमार को नियमित समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों (एसडीओ) को जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का दावा है कि सभी आवश्यक तैयारियां तय समय पर पूरी कर ली जाएंगी और 1 जुलाई से सातों नए डिग्री कॉलेजों में नियमित रूप से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। यह कदम पटना के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में हजारों छात्रों का भविष्य संवरने की उम्मीद है।