Patna Drain Road Project: पटना में बारिश के दौरान जलजमाव और सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए छह प्रमुख नालों को ढंककर सड़क बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है. इसके तहत पहाड़ी, मोहनपुर, सिटी मोट, खनुआ, बादशाही और योगीपुर नालों को विकसित करने की तैयारी है. बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) इन परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करा रहा है.
योजना का उद्देश्य शहर की जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराना है. बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी जमा होने और सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने की समस्या सामने आती है. ऐसे में नालों की क्षमता बढ़ाने, सहायक नालों को जोड़ने और जलनिकासी की बाधाओं को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
नालों को ढंककर सड़क बनाने से संबंधित इलाकों में आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकती है. इससे आसपास की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, निर्माण कार्य की लागत और परियोजना का अंतिम स्वरूप DPR तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
एक महीने में तैयार होगी DPR
बुडको ने चयनित तकनीकी एजेंसी को काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. इसमें निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, काम की मात्रा का ब्योरा (BOQ), निर्माण योग्य नक्शे और अनुमानित लागत शामिल होंगे.
रिपोर्ट को सक्षम तकनीकी संस्थान से जांच कराने के बाद सौंपना होगा. पूरी प्रक्रिया में शुरुआती संभाव्यता अध्ययन, तकनीकी आकलन, लागत निर्धारण और अंतिम निविदा दस्तावेज तैयार करने जैसे चरण शामिल हैं. इसके आधार पर आगे की निर्माण प्रक्रिया को लेकर निर्णय लिया जाएगा.
6.55 किलोमीटर लंबा है पहाड़ी नाला
योजना में शामिल पहाड़ी नाला नेटवर्क की लंबाई करीब 6.55 किलोमीटर है. इसके जलग्रहण क्षेत्र, सहायक नालों और सर्विस ड्रेनों का अध्ययन किया जाएगा, ताकि पानी की निकासी में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके.
वहीं, मोहनपुर नाले की लंबाई करीब 700 मीटर है. यह पुनाईचक से ऊर्जा पार्क के पास गांधी चौक तक फैला हुआ है. इस नाले के रास्ते में जलनिकासी की बाधाओं और अलग-अलग नालों के बीच छूटे संपर्क को दुरुस्त करने की योजना है.
योगीपुर नाला योगीपुर से बहादुरपुर टावर होते हुए भूतनाथ मेट्रो स्टेशन तक जाता है. दूसरी ओर, बादशाही पईन नंदलाल छपरा से माधोपुर तक घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है. इन क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
इसके अलावा सिटी मोट और खनुआ नालों को भी परियोजना में शामिल किया गया है. इन सभी नालों की मौजूदा स्थिति, पानी के बहाव और आसपास के ड्रेनेज नेटवर्क का आकलन किया जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार सुधार की योजना बनाई जा सके.
परियोजना की DPR तैयार करने के लिए तकनीकी एजेंसी ड्रोन सर्वे, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और बारिश के पानी के बहाव का अध्ययन करेगी. इसके जरिए नालों की मौजूदा क्षमता, जलनिकासी में रुकावट, पानी के उलटे बहाव और भूमिगत सीवरेज नेटवर्क के साथ उनके तालमेल की जांच की जाएगी.
पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का GIS आधारित डिजिटल नक्शा भी तैयार किया जाएगा. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन जगहों पर नालों के बीच संपर्क अधूरा है, कहां पुलिया या निकासी मार्ग में सुधार की जरूरत है और पानी को अंतिम निकासी स्थल तक पहुंचाने में क्या बाधाएं आ रही हैं.
बुडको की योजना नालों के बीच छूटे संपर्कों को जोड़ने और जलनिकासी के रास्तों को दुरुस्त करने की है. इन छह परियोजनाओं की DPR तैयार होने के बाद निर्माण की लागत, तकनीकी व्यवस्था और आगे की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर स्पष्ट होगी.