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02-Feb-2026 08:57 AM
By First Bihar
Patna Municipal Corporation : राजधानी पटना में प्रतिदिन लगभग 1100 टन कचरा उत्पन्न होता है। अब नगर निगम इस कचरे को चार श्रेणियों में छांटने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) के नए नियमों के तहत उठाया जा रहा है। इन नियमों के अनुसार, स्रोत पर ही कचरे को अलग-अलग वर्गों में अलग करना अनिवार्य किया गया है।
नगर निगम प्रशासन ने कहा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कचरे का उचित निपटान ही नहीं है, बल्कि पुनर्चक्रण (Recycling) और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि निगम प्रशासन ने इस प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है और इसे 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा।
कचरे की चार श्रेणियां : नए नियमों के अनुसार कचरे को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा जाएगा। इनमें शामिल हैं:-
गीला कचरा (Wet Waste): इसमें मुख्य रूप से रसोई और खाद्य अपशिष्ट शामिल होंगे।
सूखा कचरा (Dry Waste): इसमें प्लास्टिक, कागज, धातु और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुएं शामिल होंगी।
सेनेटरी कचरा (Sanitary Waste): इसमें मास्क, दस्ताने, टिश्यू और अन्य व्यक्तिगत स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट शामिल होंगे।
विशेष देखभाल वाला कचरा (Hazardous/Special Waste): इसमें बैटरी, रसायन, चिकित्सा अपशिष्ट और अन्य विशेष प्रकार का कचरा शामिल होगा।
नगर आयुक्त ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल निगम द्वारा उठाए जाने वाले कचरे तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। अब प्रत्येक परिवार को घर से ही कचरे को अलग-अलग पात्रों में डालना होगा। निगम प्रशासन ने विशेष कंटेनर और रंग कोड आधारित डस्टबिन वितरण की योजना बनाई है, ताकि नागरिक आसानी से समझ सकें कि कौन-सा कचरा किस डस्टबिन में डालना है।
नगर निगम की तैयारी
नगर निगम ने राजधानी के विभिन्न हिस्सों में कचरा संग्रहण प्रणाली को दुरुस्त करने की योजना बनाई है। इसके तहत नूतन राजधानी पाटलिपुत्र, कंकड़बाग, बांकीपुर, अजीमाबाद और पटना सिटी के सभी प्रमुख क्षेत्रों में नियमित रूप से कचरा उठाने के लिए विशेष वाहन तैनात किए जाएंगे। निगम ने कहा कि प्रतिदिन 1100 टन से अधिक कचरे का उचित प्रबंधन करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और आधुनिक मशीनरी का उपयोग किया जाएगा।
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि पटना को स्वच्छ और हरित बनाया जाए। इसके लिए नागरिकों की सहभागिता बेहद जरूरी है। यदि घर से ही कचरे का वर्गीकरण किया जाएगा तो न केवल कचरे का पुनर्चक्रण संभव होगा, बल्कि कचरे के निपटान में लगने वाला समय और संसाधन भी बचेंगे।”
नागरिकों की भूमिका
नए नियमों के अनुसार, अब प्रत्येक नागरिक को घर पर ही कचरे को चार श्रेणियों में विभाजित करना होगा। निगम प्रशासन ने इसके लिए लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की योजना बनाई है। स्कूल, कॉलेज, मोहल्ला समितियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि किस प्रकार गीला और सूखा कचरा अलग किया जाए। यह कदम पटना में कचरा प्रबंधन के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। गीला कचरा कम्पोस्टिंग के लिए उपयोग किया जा सकता है, जबकि सूखा कचरा पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के रूप में काम आएगा। सेनेटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे का सुरक्षित निपटान स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे की योजना
नगर निगम ने बताया कि 1 अप्रैल से इस नियम को पूरी तरह लागू किया जाएगा। इसके लिए पहले चरण में कचरा संग्रहण और वर्गीकरण की सुविधा प्रदान की जाएगी। बाद के चरणों में नागरिकों की निगरानी और नियमों के पालन के लिए भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि कचरे का निपटान और वर्गीकरण सुचारू रूप से हो।
नए नियमों के लागू होने के बाद पटना में कचरा प्रबंधन का ढांचा अधिक संगठित होगा और इससे शहर की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। यह पहल नगर निगम की पर्यावरण संरक्षण नीति के तहत एक अहम कदम है, जो न केवल राजधानी को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि स्वास्थ्य और पुनर्चक्रण के दृष्टिकोण से भी फायदेमंद साबित होगी।