14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए एक बयान के बाद देश में नागरिकता को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक यात्रा दस्तावेज है। मंत्रालय के इस बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से मोदी सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर नागरिकता के मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया।


विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर कहा कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसे अपने आप में नागरिकता स्थापित करने वाला दस्तावेज नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के मुताबिक पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराना है।


मंत्रालय के इस बयान के सामने आने के बाद रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर देश के नागरिकों के पास कौन-सा दस्तावेज नागरिकता साबित करने के लिए मान्य है।


उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में से यदि कोई भी नागरिकता का प्रमाणित और वैध दस्तावेज नहीं है तो केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य है।


रोहिणी आचार्य ने आगे कहा कि देश के नागरिक विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए कई प्रकार के दस्तावेज बनवाने के लिए बाध्य हैं। ऐसे में यदि ये दस्तावेज नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं तो इनके औचित्य पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पूछा कि इन दस्तावेजों के आवेदन फॉर्म में नागरिकता से संबंधित कॉलम क्यों रखा जाता है।


राजद नेता ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि मोदी सरकार अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश देना चाहती है कि बाकी सभी दस्तावेज वैध नहीं हैं और केवल बीजेपी की सदस्यता ही नागरिकता का प्रमाण बनकर रह गई है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या बीजेपी की सदस्यता का कार्ड ही नागरिकता साबित करने का वैध कार्ड है।


रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भी यह मुद्दा गर्माने लगा है। विपक्षी दल इसे केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


गौरतलब है कि भारत में नागरिकता से जुड़े मामलों में विभिन्न परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग दस्तावेजों का उपयोग किया जाता है। हालांकि विदेश मंत्रालय के बयान ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि नागरिकता साबित करने के लिए अंतिम और वैध दस्तावेज कौन-सा माना जाएगा।अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करती है या नहीं। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने की तैयारी में जुट गया है।