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25-Jan-2026 07:10 PM
By FIRST BIHAR
Padma Awards: केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कुल 131 लोगों को इन प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के तीन नायकों को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, 5 व्यक्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 नायकों को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
वहीं झारखंड राज्य गठन आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया है। इसके अलावा, बिहार के तीन नायकों को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। कला के क्षेत्र में बिहार के भरत सिंह भारती और विश्व बंधु को पद्म भूषण से नवाजा गया है जबकि साइंस एंड इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए गोपाल जी त्रिवेदी को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है।
भरत सिंह भारती वर्ष 1962 से पटना आकाशवाणी से जुड़े रहे हैं और अपने मधुर भोजपुरी लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते आए हैं। उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। अपनी टीम के साथ उन्होंने मॉरिशस में 35 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों माध्यमों पर उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों को समान रूप से लोकप्रिय बनाया। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए बिहार सरकार भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है।
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति हैं। मुजफ्फरपुर के मतलुपुर (गायघाट क्षेत्र) निवासी डॉ. त्रिवेदी राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। उन्होंने कृषि विस्तार, तकनीकी नवाचार, सतत खेती और किसानों की आय बढ़ाने के लिए व्यापक कार्य किया है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे स्वयं खेती करते हैं और गांव में रहकर मॉडल फार्मिंग का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। बिहार में मक्का और चना जैसी फसलों की उन्नत खेती तथा विज्ञान-आधारित कृषि पर उनके लेख और व्याख्यान बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।
वहीं स्वर्गीय विश्व बंधु ने बिहार की विलुप्त होती लोक गाथाओं और पारंपरिक संस्कृतियों के पुनर्जीवन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने सांस्कृतिक संस्था ‘सुरांगन’ की स्थापना कर दिसंबर 1959 से लोक गाथा, नृत्य और संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य शुरू किया। सुरांगन के पहले कार्यक्रम का आयोजन मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज की हीरक जयंती के अवसर पर हुआ था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे थे।
बता दें कि पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण—इन तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।
Padma Awards: केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कुल 131 लोगों को इन प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के तीन नायकों को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, 5 व्यक्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 नायकों को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
वहीं झारखंड राज्य गठन आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया है। इसके अलावा, बिहार के तीन नायकों को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। कला के क्षेत्र में बिहार के भरत सिंह भारती और विश्व बंधु को पद्म भूषण से नवाजा गया है जबकि साइंस एंड इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए गोपाल जी त्रिवेदी को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है।
भरत सिंह भारती वर्ष 1962 से पटना आकाशवाणी से जुड़े रहे हैं और अपने मधुर भोजपुरी लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते आए हैं। उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। अपनी टीम के साथ उन्होंने मॉरिशस में 35 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों माध्यमों पर उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों को समान रूप से लोकप्रिय बनाया। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए बिहार सरकार भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है।
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति हैं। मुजफ्फरपुर के मतलुपुर (गायघाट क्षेत्र) निवासी डॉ. त्रिवेदी राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। उन्होंने कृषि विस्तार, तकनीकी नवाचार, सतत खेती और किसानों की आय बढ़ाने के लिए व्यापक कार्य किया है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे स्वयं खेती करते हैं और गांव में रहकर मॉडल फार्मिंग का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। बिहार में मक्का और चना जैसी फसलों की उन्नत खेती तथा विज्ञान-आधारित कृषि पर उनके लेख और व्याख्यान बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।
वहीं स्वर्गीय विश्व बंधु ने बिहार की विलुप्त होती लोक गाथाओं और पारंपरिक संस्कृतियों के पुनर्जीवन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने सांस्कृतिक संस्था ‘सुरांगन’ की स्थापना कर दिसंबर 1959 से लोक गाथा, नृत्य और संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य शुरू किया। सुरांगन के पहले कार्यक्रम का आयोजन मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज की हीरक जयंती के अवसर पर हुआ था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे थे।
बता दें कि पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण—इन तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।