बिहार की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो चुकी है और अगले 72 घंटे को निर्णायक माना जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री Nitish Kumar के एक बयान—या यूं कहें कि एक सवाल पर उनकी चुप्पी—ने सियासी हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
अब तक जनता दल (यू) के नेताओं की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा था कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पसंद का होगा। लेकिन जब खुद नीतीश कुमार से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। यही चुप्पी अब बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखी जा रही है।
दिल्ली पहुंचकर बदले तेवर
दिलचस्प बात यह रही कि बिहार में मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले Nitish Kumar ने दिल्ली पहुंचने के बाद पत्रकारों से खुलकर बातचीत की। वह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।दिल्ली में उन्होंने साफ किया कि अब वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद पटना जाएंगे और वहां सभी औपचारिकताएं पूरी करेंगे।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 3-4 दिनों के भीतर वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, जब उनसे अगला मुख्यमंत्री कौन होगा या क्या वह उनकी पसंद का होगा—यह पूछा गया, तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया।
‘पसंद वाले सीएम’ पर चुप्पी क्यों?
नीतीश कुमार की चुप्पी ने सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए हैं। जेडीयू नेताओं द्वारा लगातार यह कहा जा रहा था कि अगला सीएम नीतीश कुमार की पसंद का होगा। ऐसे में जब खुद उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा, तो यह संकेत माना जा रहा है कि तस्वीर उतनी साफ नहीं है जितनी बताई जा रही थी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुप्पी कई संभावनाओं की ओर इशारा करती है— इसमें सबसे पहला यह कि क्या भाजपा पूरी तरह अपने फैसले से सीएम चुनेगी? दूसरा - क्या कोई नया चेहरा सामने आ सकता है? अब इन सवालों के जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं या कहें की इन सवालों के जवाब के लिए 72 घंटे का इंतजार करना होगा।
जेडीयू और भाजपा के बीच समीकरण
बिहार में यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से होगा। ऐसे में जेडीयू की भूमिका और नीतीश कुमार का प्रभाव कितना रहेगा, यह भी बड़ा सवाल बन गया है। दिल्ली में नीतीश कुमार के साथ मौजूद जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने भी इस सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बातचीत को समाप्त करने का संकेत दे दिया। इससे यह साफ है कि फिलहाल पार्टी भी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहना चाहती।
सीएम रेस में कौन-कौन?
भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। सबसे प्रमुख नाम मौजूदा डिप्टी सीएम Samrat Choudhary का है। वह इस समय गृह मंत्रालय संभाल रहे हैं और संगठन में भी मजबूत पकड़ रखते हैं।इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai, भाजपा नेता Dilip Jaiswal, विधायक Sanjeev Chaurasia, पूर्व मंत्री Janak Ram और पूर्व डिप्टी सीएम Renu Devi के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, डिप्टी सीएम Vijay Sinha पहले ही खुद को इस रेस से अलग बता चुके हैं।
भाजपा की रणनीति क्या होगी?
भाजपा की राजनीति को देखते हुए यह भी संभव माना जा रहा है कि पार्टी किसी नए या कम चर्चित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दे। इससे पहले भी भाजपा कई राज्यों में इस तरह के फैसले ले चुकी है।सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में भाजपा की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व मिलकर मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला कर सकते हैं। इस बैठक में कई बड़े नेताओं की मौजूदगी से संकेत मिल रहा है कि निर्णय अब ज्यादा दूर नहीं है।
आगे क्या?
बिहार की राजनीति इस समय पूरी तरह से अनिश्चितता के दौर में है। एक तरफ Nitish Kumar का दिल्ली जाना और मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संकेत, दूसरी तरफ उनके ‘पसंद वाले सीएम’ वाले सवाल पर चुप्पी—इन सबने सियासी समीकरणों को और उलझा दिया है।
अब सबकी नजरें अगले 72 घंटों पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि बिहार की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी। क्या यह फैसला नीतीश कुमार की पसंद से होगा या भाजपा अपनी रणनीति के तहत कोई नया दांव खेलेगी—यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।