Bihar Politics : बिहार की राजनीति में मंगलवार की सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पहुंचे, लेकिन वहां जो हुआ उसने मौजूद कार्यकर्ताओं, नेताओं और मीडिया कर्मियों को हैरान कर दिया।
सुबह-सुबह जैसे ही नीतीश कुमार का काफिला संजय झा के आवास पर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों में हलचल तेज हो गई। सभी को उम्मीद थी कि नीतीश कुमार गाड़ी से उतरेंगे, लोगों से मुलाकात करेंगे और शायद कुछ राजनीतिक संदेश भी देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संजय झा खुद गाड़ी के पास पहुंचे और नीतीश कुमार से बाहर आने का आग्रह करने लगे। इस दौरान नीतीश कुमार गाड़ी के अंदर बैठे रहे और बाहर खड़े लोगों की ओर हाथ जोड़कर अभिवादन करते दिखाई दिए। संजय झा ने एक-दो नहीं बल्कि कई बार उनसे बाहर निकलकर लोगों से मिलने का अनुरोध किया।
इतना ही नहीं, नीतीश कुमार के निजी सहायक हरेंद्र भी कई बार गाड़ी के पास पहुंचे और उनसे बाहर आकर मौजूद लोगों से बात करने की अपील करते रहे। लगातार अनुरोध के बाद आखिरकार नीतीश कुमार कुछ क्षणों के लिए गाड़ी से बाहर निकले। लेकिन बाहर आते ही उन्होंने संजय झा से कहा, “आप ही बात कर लीजिए।”
इसके बाद वे ज्यादा देर तक नहीं रुके और दोबारा अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गए। इस दौरान वहां मौजूद जेडीयू कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और मीडिया कर्मी उनकी एक झलक और बातचीत का इंतजार करते रहे, लेकिन नीतीश कुमार ने किसी से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार ने गाड़ी के अंदर बैठे-बैठे ही कई बार हाथ जोड़कर अभिवादन किया, लेकिन वे भीड़ के बीच जाने या मीडिया से बातचीत करने के मूड में नजर नहीं आए। कुछ ही देर बाद उनका काफिला वहां से रवाना हो गया।
इस घटनाक्रम की चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि एक दिन पहले ही पूर्व सांसद आनंद मोहन ने नीतीश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया था। आनंद मोहन ने आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार को सुबह-सुबह कुछ “चिरकुट नेताओं” के यहां ले जाया जाता है और उनसे मुलाकात कराई जाती है। उनके इस बयान के बाद संजय झा के आवास पर नीतीश कुमार की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि जेडीयू की ओर से इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार और संगठनात्मक गतिविधि बताया जा रहा है। लेकिन जिस तरह से नीतीश कुमार ने मौजूद लोगों से दूरी बनाए रखी और बातचीत से बचते नजर आए, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह सिर्फ एक सामान्य मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? क्या नीतीश कुमार सार्वजनिक रूप से कम बोलने की रणनीति अपना रहे हैं या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं, लेकिन मंगलवार सुबह का यह दृश्य बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जेडीयू या खुद नीतीश कुमार की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।