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10-Mar-2026 12:46 PM
By First Bihar
Nitish Kumar : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण के तहत मंगलवार को सुपौल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य के विकास कार्यों की चर्चा की और आने वाले पांच वर्षों के लिए अपनी सरकार का विजन भी जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देना, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और बिहार में उद्योग तथा बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करना है।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले पांच वर्षों में राज्य के 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही 50 लाख युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध करा चुकी है और आने वाले समय में इस संख्या को और तेजी से बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी सरकार कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 2-2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को पहले चरण में 10-10 हजार रुपये की सहायता दी गई है। जिन महिलाओं का रोजगार अच्छा चलेगा उन्हें आगे और आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2005 से पहले की सरकारों पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2005 के पहले बिहार में विकास का कोई काम नहीं हुआ था और राज्य की स्थिति काफी खराब थी। उन्होंने कहा कि उस समय अपराध और अराजकता का माहौल था और लोग शाम होने के बाद घरों से बाहर निकलने से डरते थे। हत्या, लूट और डकैती जैसी घटनाएं आम बात थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद बिहार में कानून का राज स्थापित हुआ और विकास का काम शुरू हुआ।
उन्होंने कहा कि पहले बिहार में हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव की घटनाएं होती थीं, लेकिन अब राज्य में भाईचारे का माहौल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2006 से राज्य में कब्रिस्तानों की घेराबंदी का काम शुरू किया गया था ताकि विवाद की स्थिति न बने। बाद में 2016 से मंदिरों की घेराबंदी का भी काम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए समान रूप से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की बहाली की जा चुकी है और कुल मिलाकर सरकारी शिक्षकों की संख्या 5 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले स्कूलों की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन अब शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है।
महिलाओं के लिए किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस में 35 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया गया है और 2016 से सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए 2006 में विश्व बैंक की मदद से कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसे जीविका दीदी के नाम से जाना जाता है। इससे लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की भी तारीफ की और कहा कि बिहार के विकास में केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 के बजट में बिहार को विशेष आर्थिक सहायता दी गई है और मखाना बोर्ड के गठन जैसे फैसलों से राज्य के किसानों और उद्यमियों को फायदा होगा। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
आने वाले पांच वर्षों के विकास कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पांच नए एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे और ग्रामीण सड़कों को भी बेहतर किया जाएगा। इसके अलावा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं, जिसके तहत निवेशकों को मुफ्त जमीन और अनुदान दिया जाएगा। बंद पड़ी पुरानी मिलों को भी फिर से चालू करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा ताकि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में रोजगार को दोगुना करना और प्रति व्यक्ति आय को भी दोगुना करना है।
सभा के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य बिहार को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना और राज्य के लोगों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता के सहयोग से बिहार आने वाले वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा।