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12-Mar-2026 12:46 PM
By First Bihar
BIHAR NEWS : बिहार की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प सियासी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिल रहे बार-बार के आशीर्वाद और मंच पर दिख रही खास केमिस्ट्री ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या नीतीश कुमार इशारों-इशारों में भाजपा को अपना पसंदीदा चेहरा बता रहे हैं।
हालांकि बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा है, लेकिन बिहार में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि भविष्य में अगर भाजपा को मुख्यमंत्री पद का मौका मिलता है तो वह किस नेता को आगे करेगी। इसी बीच सीमांचल के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके साथ मौजूद भाजपा नेता तथा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मंचीय तस्वीरों ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
समृद्धि यात्रा के दौरान मधेपुरा में एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच से हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन कर रहे थे, जबकि उनके बगल में खड़े सम्राट चौधरी हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन कर रहे थे। यह दृश्य कुछ ऐसा लग रहा था मानो मुख्यमंत्री किसी खास नेता का परिचय जनता से करा रहे हों। इस तस्वीर ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक खूब चर्चा बटोरी।
इसके बाद अररिया से भी कुछ वैसी ही तस्वीरें सामने आईं। यहां भी मंच पर नीतीश कुमार हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन कर रहे थे, जबकि सम्राट चौधरी करबद्ध मुद्रा में जनता के सामने खड़े नजर आए। लगातार सामने आ रही इन तस्वीरों को लेकर सियासी विश्लेषक तरह-तरह के अर्थ निकालने लगे हैं।
तीसरे दिन भी समृद्धि यात्रा के मंच से एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। अपने भाषण के दौरान अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के पास पहुंचे और उनके कंधे पर हाथ रख दिया। उस समय सम्राट चौधरी हाथ जोड़कर जनता की ओर मुखातिब थे। यह दृश्य भी काफी देर तक चर्चा का विषय बना रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार की राजनीति में प्रतीकों और संकेतों का खास महत्व रहा है। ऐसे में मंच पर नेताओं के हाव-भाव और उनके बीच की नजदीकियां भी कई बार बड़े राजनीतिक संदेश देती हैं। इसी वजह से समृद्धि यात्रा के दौरान सामने आ रही तस्वीरों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।
इधर, सम्राट चौधरी भी सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वह लगातार यह कह रहे हैं कि बिहार के विकास में नीतीश कुमार की बड़ी भूमिका रही है और आगे भी सरकार उनके मार्गदर्शन में काम करती रहेगी। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि भाजपा फिलहाल नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए ही आगे बढ़ना चाहती है।
दरअसल, भाजपा पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि बिहार में अगली सरकार भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बनेगी। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में अगर मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा किसी चेहरे का चयन करती है, तो उसमें नीतीश कुमार की पसंद और नापसंद भी अहम भूमिका निभा सकती है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि अगर भाजपा को बिहार में मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिलता है, तो वह सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किसी पिछड़े वर्ग (ओबीसी) या अति पिछड़े वर्ग (ईबीसी) से आने वाले नेता को आगे कर सकती है। यह वही सामाजिक आधार है, जिस पर नीतीश कुमार की राजनीति लंबे समय से टिकी रही है।
फिलहाल समृद्धि यात्रा के मंच से दिख रही नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की केमिस्ट्री ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। हालांकि भाजपा या जेडीयू की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह सवाल जरूर गूंजने लगा है कि क्या यह सिर्फ संयोग है या फिर भविष्य की राजनीति का कोई संकेत।