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06-Apr-2026 09:06 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार की सियासत एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री विधानमंडल दल की महत्वपूर्ण बैठक बुला सकते हैं, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, 12 अप्रैल को विधानमंडल दल की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। इस बैठक में मौजूदा मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी को लेकर फैसला लिया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक बिहार की सत्ता के अगले चेहरे को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। बैठक में चुने गए नेता को ही सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली के दौरे पर जाएंगे। इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद ही बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। दिल्ली से लौटने के बाद वे सीधे विधायक दल की बैठक करेंगे और उसके बाद राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
इससे पहले 8 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक भी प्रस्तावित है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह बैठक मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक हो सकती है। ऐसे में इस बैठक में कई अहम फैसले लिए जाने की संभावना है, जो आने वाली सरकार के लिए आधार तैयार करेंगे। कैबिनेट बैठक को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
नई सरकार के गठन को लेकर एक और अहम पहलू ‘खरमास’ को माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार का गठन खरमास खत्म होने के बाद ही किया जाएगा। इसका मतलब है कि बिहार में नई सरकार बनने के लिए कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, 10 अप्रैल के बाद ही सरकार गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी। राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीति बनाने का दौर तेज हो गया है। सत्ता समीकरणों को साधने और बहुमत सुनिश्चित करने के लिए पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर से गर्मा दिया है। विपक्षी दल भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी मौके का फायदा उठाने की तैयारी में हैं। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी मंथन जारी है कि अगला नेतृत्व किसके हाथों में सौंपा जाए।
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अगर वे इस्तीफा देते हैं, तो राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा और एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी।