नई दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण किया। संसद भवन में आयोजित इस औपचारिक समारोह में उन्होंने शपथ लेने के बाद एक बार फिर अपने सहज और परिचित राजनीतिक अंदाज से सभी का ध्यान खींच लिया। शपथ ग्रहण के बाद जब वे लोकसभा भवन से बाहर निकल रहे थे, उसी दौरान पोर्टिको क्षेत्र में खड़े तीन सदस्यों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“आप लोग हमें प्रणाम कर रहे हैं, पहले तो हम वहीं न थे, अब इधर आ गए हैं।”
नीतीश कुमार के इस हल्के-फुल्के और प्रतीकात्मक बयान को उनके राजनीतिक सफर और अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने इशारे में यह संदेश देने की कोशिश की कि वे पहले लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं और अब राज्यसभा में अपनी नई भूमिका शुरू कर रहे हैं। उनका यह बयान वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नीतीश कुमार ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। वे पूरी तरह औपचारिकता निभाते हुए शांत और संयमित नजर आए, लेकिन उनके चेहरे पर वही पुराना आत्मविश्वास और राजनीतिक परिपक्वता साफ झलक रही थी, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार आज देर शाम या फिर कल सुबह पटना लौट सकते हैं। पटना पहुंचने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है, क्योंकि राज्य में एनडीए विधानमंडल दल की अहम बैठक बुलाई जा रही है। इस बैठक में बिहार की नई राजनीतिक दिशा और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि राज्य की सत्ता की कमान अब किस नेता के हाथों में होगी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के इस नए कदम के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसके साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि नीतीश कुमार पटना स्थित लोकभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इसके तुरंत बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और उसके बाद संभावित इस्तीफा बिहार की सत्ता समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत है। एनडीए गठबंधन के भीतर भी नई रणनीति और नेतृत्व को लेकर मंथन तेज हो गया है।
फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें पटना में होने वाली आगामी बैठक और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। आने वाले 24 से 72 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।