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Bihar News : 20 साल तक बिहार में चला Nitish Kumar का जादू, BJP से गठबंधन कई बार बिगड़ा और कई बार बना; पढ़िए क्या रहा है हिस्ट्री

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar का नाम सबसे आगे है, जिससे राज्य और देश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

05-Mar-2026 01:25 PM

By First Bihar

Bihar News : बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई है। राज्यसभा चुनाव को लेकर सामने आ रही खबरों में मुख्यमंत्री Nitish Kumar का नाम सबसे प्रमुख रूप से उभर कर सामने आया है। ऐसे में पूरे देश की नजरें अब बिहार की सियासत पर टिक गई हैं। दरअसल, एनडीए के जिन प्रमुख नेताओं और घटक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने राज्यसभा के लिए नामांकन की है, उनमें कई अनुभवी और बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हैं, लेकिन इनमें सबसे बड़ा और अहम नाम नीतीश कुमार का ही माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि वे पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे हैं और राज्य की राजनीति पर उनका गहरा प्रभाव रहा है।


नीतीश कुमार बिहार की राजनीति का ऐसा चेहरा हैं जो करीब 20 साल से सत्ता की धुरी बने हुए हैं। साल 2005 में उन्होंने पहली बार Bharatiya Janata Party के साथ मिलकर बिहार में अपनी सरकार बनाई थी। उस समय राज्य में कानून व्यवस्था और विकास को लेकर बड़े बदलाव की उम्मीदें जताई गई थीं। मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने “सुशासन बाबू” की जो छवि बनाई, वह आज भी उनके राजनीतिक व्यक्तित्व का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है।


नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री भी रहे हैं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को बड़ी जीत मिली थी, जिसके बाद उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लगातार कई बार मुख्यमंत्री बनने के कारण उन्होंने एक तरह से राजनीतिक रिकॉर्ड भी कायम किया है।


नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1970 के दशक में JP Movement से मानी जाती है। उस दौर में उन्होंने छात्र राजनीति से लेकर सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान भी वे जेल गए थे, जिससे उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत हुई। बाद में उन्होंने समता पार्टी के माध्यम से अपनी राजनीति को नई दिशा दी।


संसदीय राजनीति में भी नीतीश कुमार का लंबा अनुभव रहा है। 1989 में जनता दल से जुड़ने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 1990 के दशक में वे केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे और Atal Bihari Vajpayee की सरकार में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। वर्ष 1994 में उन्होंने George Fernandes के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना की, जो आगे चलकर Janata Dal (United) के रूप में विकसित हुई।


बिहार की राजनीति में गठबंधन बदलने को लेकर भी नीतीश कुमार अक्सर चर्चा में रहे हैं। 2013 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर अपना रास्ता अलग किया। इसके बाद 2015 में उन्होंने Lalu Prasad Yadav की पार्टी Rashtriya Janata Dal के साथ मिलकर महागठबंधन सरकार बनाई। हालांकि 2017 में उन्होंने फिर भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। इसके बाद 2022 में वे दोबारा महागठबंधन में शामिल हुए और फिर 2024 में एनडीए में वापसी कर ली।


नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में 2014 का लोकसभा चुनाव एक अहम मोड़ साबित हुआ था। उस चुनाव में जनता दल (यू) को भारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद महादलित नेता Jitan Ram Manjhi को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि करीब नौ महीने बाद राजनीतिक परिस्थितियों के कारण मांझी को पद छोड़ना पड़ा और नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन गए।


हालांकि नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री बनने की कहानी 2005 से पहले भी शुरू हो चुकी थी। साल 2000 में उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण उन्हें मात्र सात दिनों में इस्तीफा देना पड़ा था।


राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नीतीश कुमार की भूमिका अहम रही है। विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के प्रयास में भी उनका नाम प्रमुख रूप से लिया जाता रहा है। हालांकि बार-बार गठबंधन बदलने को लेकर विपक्षी दल उन पर “पलटू राम” कहकर भी हमला करते रहे हैं।


अब राज्यसभा चुनाव को लेकर नमांकन के बाद बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आने की चर्चा तेज हो गई है। नीतीश कुमार राज्यसभा जाने के बाद यह न केवल उनके राजनीतिक करियर का एक नया अध्याय होगा, बल्कि बिहार की सत्ता और राज्य की राजनीति में भी बड़े बदलाव की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।