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05-Mar-2026 06:10 AM
By First Bihar
Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि उनके राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सत्ता में बड़ा फेरबदल होगा और राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुख्यमंत्री देखने को मिल सकता है।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने हैं और इसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने भी अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार खुद राज्यसभा जाने के लिए तैयार हुए हैं और यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है।
विजय कुमार चौधरी के मुताबिक, नीतीश कुमार आज सुबह 11:30 बजे राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह का दबाव नहीं है, बल्कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है।
जानकारी के अनुसार, बिहार से राज्यसभा की कुल पांच सीटें इस बार खाली हो रही हैं। इन सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख आज ही है, जिसके चलते सभी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सीटों का बंटवारा भी लगभग तय हो चुका है।
भाजपा की ओर से दो सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा चुके हैं। वहीं, एक सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा को दी गई है, जो अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। इसके अलावा जेडीयू कोटे से एक सीट पर नीतीश कुमार का नाम तय किया गया है।
बची हुई एक सीट को लेकर भी सहमति बन चुकी है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के परिवार से जुड़े सदस्य को दिए जाने की चर्चा है, जिससे सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह कदम बिहार में सत्ता संतुलन को नए सिरे से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है। भाजपा, जो लंबे समय से बिहार में मुख्यमंत्री पद की दावेदार रही है, अब इस मौके का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।
यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो मुख्यमंत्री पद खाली हो जाएगा और ऐसे में भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही जेडीयू को सरकार में सहयोगी की भूमिका में रहना पड़ सकता है। यह बदलाव न सिर्फ सत्ता के समीकरण को बदलेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ेगा।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। लेकिन इतना तय है कि यह बदलाव राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने वाला है।