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08-Mar-2026 09:51 AM
By First Bihar
Nitish kumar : बिहार की राजनीति में पिछले चार दिनों से चल रहा सस्पेंस अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने न केवल अपने पद से इस्तीफा देने के संकेत दे दिए हैं, बल्कि गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका भी तैयार कर दी है। इसे बिहार की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। करीब दो दशकों तक राज्य की राजनीति पर अपनी छाप छोड़ने वाले नीतीश कुमार अब सक्रिय राज्य राजनीति से दूरी बनाकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
इसी बीच शुक्रवार को जेडीयू की हाई-प्रोफाइल बैठक ने इस पूरे राजनीतिक ट्रांजिशन को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पार्टी के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की इस बैठक में सत्ता हस्तांतरण को लेकर व्यापक चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार बैठक में यह मौखिक सहमति बन गई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। हालांकि औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है।
दरअसल बिहार की राजनीति में होली के माहौल के साथ शुरू हुई हलचल ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। गुरुवार को पटना में नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अगले एक सप्ताह के भीतर नीतीश कुमार राजभवन जाकर अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप सकते हैं। इसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
जेडीयू के भीतर से मिल रही जानकारी के मुताबिक,आज निशांत कुमार जेडीयू ज्वाइन करेंगे उसके बाद उन्हें जल्द ही विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुमार हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। लेकिन बदलते राजनीतिक हालात और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि संगठन को एकजुट रखने के लिए निशांत कुमार एक स्वीकार्य चेहरा हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि नई सरकार के गठन के बाद निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। वहीं जेडीयू के संगठनात्मक ढांचे की कमान पहले की तरह अनुभवी नेताओं के पास ही रहने की संभावना है ताकि पार्टी का संतुलन बना रहे।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। दरअसल नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की शर्तों में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह बताया जा रहा है कि बिहार में मुख्यमंत्री का पद अब बीजेपी को दिया जाए। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत और बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन के बाद पार्टी राज्य में अपना मुख्यमंत्री चाहती है। मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के पास 89 विधायक हैं जबकि जेडीयू के पास 85 विधायक हैं। ऐसे में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
बीजेपी के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चा तेज है। पार्टी के दो बड़े नेताओं—सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय—के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इनमें से किसी एक नेता को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी संभावना है। इनमें एक जेडीयू से, संभवतः निशांत कुमार, और दूसरा बीजेपी से किसी सवर्ण चेहरे को बनाया जा सकता है।
इस पूरी व्यवस्था में नीतीश कुमार की भूमिका भी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे केंद्र और बिहार के बीच एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। एनडीए के अंदर उन्हें एक अनुभवी और संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, इसलिए माना जा रहा है कि वे सरकार को राजनीतिक दिशा देने का काम करते रहेंगे।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार का इस्तीफा राज्यसभा चुनाव के नतीजों के औपचारिक ऐलान से पहले ही हो सकता है। 10 अप्रैल से पहले यह प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल बिहार की राजनीति के लिए अगले 72 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। इसी दौरान नई सरकार के गठन, मुख्यमंत्री के नाम और कैबिनेट के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
हालांकि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह जनादेश का अपमान है और सत्ता की राजनीति का नया उदाहरण है। लेकिन एनडीए के पास विधानसभा में भारी बहुमत है, इसलिए सरकार की स्थिरता को लेकर कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता।
कुल मिलाकर बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले कुछ दिनों में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा और नीतीश कुमार एक नई राजनीतिक भूमिका में नजर आएंगे। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में अगले 72 घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।