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07-Mar-2026 04:23 PM
By First Bihar
PATNA:हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। नामांकन पर्चा भरने के बाद वो पैतृक गांव बख्तियारपुर के लिए रवाना हुए। इस दौरान वे इलाके में चल रहे विकास कार्यों का भी जायजा लिया।
पटना के बख्तियारपुर प्रखंड स्थित श्री गणेश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया। वही बख्तियारपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के पास निर्माणाधीन ROB का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिये।
इससे पहले मुख्यमंत्री बख्तियारपुर-ताजपुर पुल समेत अन्य प्रमुख पथ निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने आए थे। अधिकारियों से मिलने के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली। लेकिन जब उन्होंने देखा कि कुछ परियोजनाओं में अपेक्षित गति नहीं है, तो मुख्यमंत्री ने मौके पर ही संबंधित RCD (पथ निर्माण विभाग) के वरिष्ठ अधिकारी को हड़काया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा, “हमने पहले ही निर्देश दे दिए थे कि यह कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अब इतनी देरी क्यों हो रही है?” मुख्यमंत्री के सवालों और गंभीर स्वर के सामने अधिकारी स्तब्ध रह गए। इस दौरान अधिकारी ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री से एक महीने की मोहलत मांगने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि इस समय सीमा में सभी कार्य पूरे कर दिए जाएंगे।
नीतीश कुमार की इस कड़ी प्रतिक्रिया से यह साफ दिखा कि उनके लिए समयबद्धता और विकास कार्यों की गुणवत्ता सर्वोपरि है। अधिकारियों के लिए यह एक चेतावनी के रूप में भी देखा जा सकता है कि विकास कार्यों में कोई ढिलाई या आलस्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह रवैया उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और विकास प्राथमिकताओं का परिचायक है। वह सिर्फ नीतियों और योजनाओं का ऐलान नहीं करते, बल्कि उनके क्रियान्वयन पर भी लगातार निगरानी रखते हैं। बिहार में यह प्रवृत्ति पिछले कई वर्षों से दिखाई देती रही है, जहां मुख्यमंत्री ने कई परियोजनाओं में अधिकारियों को समय पर कार्य पूरा करने के लिए निर्देशित किया है।
बख्तियारपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल पुल निर्माण कार्य की समीक्षा की, बल्कि क्षेत्र के अन्य सड़कों और पथ निर्माण से जुड़े कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया। अधिकारियों के हाथ जोड़कर मोहलत मांगने के दृश्य ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण सख्त और नीतिगत है, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को पर्याप्त समय देने में भी समझदारी दिखाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बख्तियारपुर-ताजपुर पुल का निर्माण कार्य इस क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आवागमन में सुविधा होगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके बावजूद अगर निर्माण में देरी होती है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप समय पर कार्य पूरा कराने और जनता को सुविधा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भी सक्रिय रूप से राज्य के विकास कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं। भले ही राजनीतिक जिम्मेदारियों के चलते उनका ध्यान अन्य क्षेत्रों की ओर भी हो, लेकिन विकास कार्यों की निगरानी और अधिकारियों को समयबद्ध कार्य निष्पादन के लिए प्रेरित करना उनकी प्राथमिकता में शामिल है।
अधिकारियों के लिए यह संदेश स्पष्ट है – चाहे स्थिति कैसी भी हो, विकास कार्यों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। और इस बार बख्तियारपुर में हुए इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि मुख्यमंत्री के सामने कोई भी अधिकारी हाथ जोड़कर ही मोहलत मांगने की स्थिति में आ सकता है। कुल मिलाकर, बख्तियारपुर दौरे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि नीतीश कुमार अपने पुराने अंदाज में ही अधिकारियों को काम पूरा कराने के लिए सख्त और सक्रिय हैं। अधिकारियों की मोहलत की गुहार और मुख्यमंत्री की सख्ती दोनों ही राज्य प्रशासनिक कार्यशैली का आईना हैं।


















