Bihar News : स्वतंत्रता दिवस सिर्फ देशभक्ति और तिरंगे का पर्व नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति के इतिहास में भी 15 अगस्त की अपनी खास अहमियत रही है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम 15 अगस्त से जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे अब तक कोई दूसरा मुख्यमंत्री नहीं तोड़ सका है। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 18 बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया।


लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान नीतीश कुमार के लिए गांधी मैदान का स्वतंत्रता दिवस समारोह एक नियमित और महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक अवसर बन गया था। हर साल वे यहां राष्ट्रध्वज फहराते, परेड की सलामी लेते और राज्य की जनता को संबोधित करते थे।


गांधी मैदान में 18 बार झंडोतोलन का रिकॉर्ड

बिहार की सियासत में कई बड़े नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे, लेकिन गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सबसे ज्यादा बार झंडा फहराने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम है।


नीतीश कुमार ने अलग-अलग कार्यकालों को मिलाकर मुख्यमंत्री के रूप में गांधी मैदान में 18 बार तिरंगा फहराया। यही वजह है कि 15 अगस्त आते ही उनका यह रिकॉर्ड एक बार फिर चर्चा में आ जाता है।


यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि मुख्यमंत्री के रूप में स्वतंत्रता दिवस समारोह में झंडोतोलन राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा है। गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ आने वाले वर्षों का रोडमैप भी जनता के सामने रखते रहे हैं।


पहली बार 2000 में बने थे मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि उनका पहला कार्यकाल बेहद छोटा रहा और करीब सात दिन बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा।


इसके बाद नवंबर 2005 में वे दोबारा बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उनके नेतृत्व में लंबे समय तक बिहार की राजनीति चली। बीच में जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने, लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने फिर मुख्यमंत्री पद संभाला।


यही लंबे राजनीतिक सफर और मुख्यमंत्री के रूप में लगातार कई कार्यकालों ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस के गांधी मैदान समारोह में रिकॉर्ड बनाने का मौका दिया।


गांधी मैदान और नीतीश कुमार का खास रिश्ता

पटना का गांधी मैदान बिहार के राजनीतिक इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बड़े समारोहों के अलावा यहां राजनीतिक रैलियां और ऐतिहासिक कार्यक्रम भी होते रहे हैं।


मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के कार्यकाल में हर साल 15 अगस्त को गांधी मैदान में होने वाला कार्यक्रम लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहता था। तिरंगा फहराने के बाद मुख्यमंत्री अपने भाषण में सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और भविष्य की प्राथमिकताओं का जिक्र करते थे।


18 बार झंडोतोलन करने का रिकॉर्ड इसी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा है।


2023 में टूट गया था सुरक्षा घेरा

नीतीश कुमार से जुड़ा 15 अगस्त का एक दिलचस्प और चर्चित वाकया वर्ष 2023 का भी है। उस समय गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एक युवक सुरक्षा घेरा तोड़कर मंच के नजदीक पहुंचने की कोशिश करने लगा था।


दिलचस्प बात यह थी कि उस युवक का नाम भी नीतीश कुमार था। बताया गया कि वह मुंगेर जिले का रहने वाला था और अपने दिवंगत पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था।


सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल युवक को पकड़ लिया और उससे पूछताछ की। इस घटना ने उस समय समारोह की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।


15 अगस्त के मंच से बड़े ऐलान भी

बिहार की राजनीति में स्वतंत्रता दिवस समारोह सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा है। कई बार मुख्यमंत्री गांधी मैदान से बड़ी घोषणाएं करते रहे हैं।


नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी 15 अगस्त के मंच से सरकार की योजनाओं और रोजगार समेत कई मुद्दों पर घोषणाएं की गईं। यही वजह है कि गांधी मैदान का भाषण बिहार की राजनीति में काफी महत्व रखता है।


अब रिकॉर्ड पर सबकी नजर

नीतीश कुमार फिलहाल बिहार के मुख्यमंत्री नहीं हैं और राज्यसभा के सांसद हैं। ऐसे में गांधी मैदान में 18 बार झंडोतोलन का उनका रिकॉर्ड अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है।


बिहार की राजनीति में आने वाले वर्षों में कोई मुख्यमंत्री इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचता है या इसे पीछे छोड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल 15 अगस्त के मौके पर गांधी मैदान में सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम ही दर्ज है।


यानी बिहार के राजनीतिक इतिहास में स्वतंत्रता दिवस की बात हो और गांधी मैदान का जिक्र आए, तो नीतीश कुमार के इस रिकॉर्ड को नजरअंदाज करना मुश्किल है। 18 बार तिरंगा फहराने का यह आंकड़ा उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल की एक अलग पहचान बन चुका है।