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Nishant Kumar :कोई एक्टर, कोई क्रिकेटर… अब इंजीनियर साहब की पॉलिटिकल एंट्री; निशांत के सामने सबसे बड़ी परीक्षा —खुद को बनाना नंबर-वन आइडेंटिटी

मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने राजनीति में एंट्री कर ली है। उन्होंने कहा कि पिता के 20 साल के विकास कार्यों को आगे बढ़ाना उनका लक्ष्य है।

08-Mar-2026 02:12 PM

By First Bihar

Nishant Kumar : बिहार की सियासत इन दिनों एक नए चेहरे को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रख दिया है। उनके इस फैसले के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेतृत्व की शुरुआत की चर्चा तेज हो गई है। निशांत कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका लक्ष्य सत्ता या पद नहीं, बल्कि जनता के दिलों में जगह बनाना है और अपने पिता द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।


निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश भले ही औपचारिक रूप से अब हुआ हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम लंबे समय से संभावित था। बिहार की राजनीति में कई बड़े नेताओं ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकारियों को आगे बढ़ाया है। ऐसे में निशांत का राजनीति में आना किसी बड़े आश्चर्य की बात नहीं मानी जा रही है।


अगर बिहार की राजनीति के पिछले कुछ वर्षों पर नजर डालें तो कई प्रमुख नेताओं के बेटे अब सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख Lalu Prasad Yadav ने भी अपने दोनों बेटों को राजनीति में उतारा। उनके छोटे बेटे Tejashwi Yadav आज बिहार की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। हालांकि तेजस्वी की शुरुआत राजनीति से नहीं बल्कि क्रिकेट से हुई थी। उन्होंने एक समय इंडियन प्रीमियर लीग में Delhi Daredevils की टीम से जुड़कर क्रिकेट में करियर बनाने की कोशिश की थी। लेकिन बाद में लालू यादव ने उन्हें सक्रिय राजनीति में लाया।


आज तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर हैं और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उन्होंने कई चुनावी अभियानों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है और विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में भी उन्हें देखा जाता है। तेजस्वी दो बार बिहार के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं जब उनकी पार्टी ने जदयू के साथ गठबंधन में सरकार बनाई थी।


इसी तरह लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक Ram Vilas Paswan के बेटे Chirag Paswan भी आज राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। हालांकि चिराग की शुरुआती रुचि राजनीति में नहीं बल्कि फिल्म और अभिनय की दुनिया में थी। उन्होंने बॉलीवुड में भी किस्मत आजमाई, लेकिन वहां उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। इसके बाद रामविलास पासवान ने उन्हें राजनीति में सक्रिय किया।


राजनीति में आने के बाद चिराग पासवान ने धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। आज उनके पास एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आधार है। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं और उनकी छवि एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में बन चुकी है।


अगर बात निशांत कुमार की करें तो शिक्षा के मामले में वे इन दोनों नेताओं से काफी आगे माने जाते हैं। जहां तेजस्वी यादव की पढ़ाई नौवीं कक्षा तक बताई जाती है, वहीं चिराग पासवान ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की है। दूसरी ओर निशांत कुमार ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड मजबूत माना जाता है।


हालांकि पढ़ाई और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद निशांत कुमार अब तक राजनीति और सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहे हैं। वे शायद ही कभी किसी राजनीतिक मंच या सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। मीडिया और ग्लैमर से भी वे हमेशा दूरी बनाकर रखते रहे हैं। यही कारण है कि उनका व्यक्तित्व अब तक एक निजी और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आता रहा है।


लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनका राजनीति में प्रवेश एक अहम मोड़ माना जा रहा है। जब उनके पिता नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने और राज्यसभा जाने की चर्चाएं तेज हुईं, तब यह माना जाने लगा कि परिवार से कोई न कोई व्यक्ति राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगा। ऐसे में निशांत कुमार का सामने आना स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।


राजनीति में अपनी शुरुआत करते हुए निशांत कुमार ने साफ किया कि उनका लक्ष्य बिहार के विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने पिछले करीब दो दशकों में राज्य में जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे जनता के दिलों में अपनी जगह बनाना चाहते हैं और लोगों के भरोसे पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार के सामने चुनौती भी बड़ी होगी। बिहार की राजनीति काफी प्रतिस्पर्धी और जटिल मानी जाती है। ऐसे में उन्हें न केवल अपनी अलग पहचान बनानी होगी बल्कि जनता के बीच जाकर अपने नेतृत्व और राजनीतिक कौशल को भी साबित करना होगा।


हालांकि यह भी सच है कि बिहार की राजनीति में परिवारवाद के उदाहरण पहले से मौजूद हैं और कई नेता अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सफल भी हुए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निशांत कुमार किस तरह से अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाते हैं और क्या वे भी अपने पिता की तरह बिहार की राजनीति में एक मजबूत स्थान बना पाते हैं।