Bihar Ganga Pollution: बिहार में गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य के उन शहरी निकायों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है, जहां बिना शोधन (ट्रीटमेंट) के नालों का गंदा पानी और कचरा सीधे गंगा नदी में बहाया जा रहा है। इस संबंध में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।



एनजीटी ने यह आदेश एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेने के बाद जारी किया, जिसमें दावा किया गया था कि बिहार में गंगा नदी का पानी नहाने के लिए भी सुरक्षित नहीं रह गया है। 3 अगस्त को जारी आदेश में एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि बिहार के 27 जिलों में गंगा, सोन, कोसी, बागमती समेत अन्य नदियों में प्रदूषण की स्थिति की जांच की जा रही है।



बिहार सरकार के पर्यावरण विभाग ने अपने हलफनामे में एनजीटी को बताया है कि बक्सर से मुंगेर तक कई खुले नालों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूषित पानी गंगा नदी में बहाया जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।



सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति पर भी मांगी रिपोर्ट

एनजीटी ने बिहार सरकार से राज्य में संचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता और निर्माण कार्य की प्रगति का पूरा ब्योरा भी मांगा है। वर्तमान में बिहार में 43 एसटीपी हैं, जिनमें 15 चालू हैं, 5 ट्रायल मोड में, 9 निर्माणाधीन हैं, 4 के टेंडर की प्रक्रिया जारी है और 10 के लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इन प्लांटों से निकलने वाला पानी निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो।



बक्सर से पटना और मुंगेर तक बह रहा लाखों लीटर गंदा पानी

हलफनामे के अनुसार, बक्सर में 7 नालों से प्रतिदिन 50 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन), आरा में 5 नालों से 47 एमएलडी, पटना में 15 नालों से लगभग 349 एमएलडी, बरौनी में 23 एमएलडी और मुंगेर के जमालपुर में 25 एमएलडी दूषित पानी सीधे गंगा में बहाया जा रहा है।



इसके अलावा, बक्सर के डुमरांव और लखीसराय के बड़हिया में कई खुले नाले अब तक सीवेज नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। एनजीटी ने सरकार से पूछा है कि इन नालों से बिना ट्रीटमेंट वाला सीवेज नदी में जाने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।



सीवेज नेटवर्क पूरा करने की समय-सीमा बताने के निर्देश

एनजीटी ने राज्य सरकार से सीवेज नेटवर्क पूरा करने की समय-सीमा, इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी और फंड की उपलब्धता की जानकारी भी मांगी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि जहां बिना शोधन का सीवेज गंगा में बहाया जा रहा है, वहां संबंधित शहरी निकायों के खिलाफ पर्यावरणीय जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।