रात का सन्नाटा था... जेल की ऊंची दीवारें खामोश थीं। पहरेदारों को भी भनक नहीं थी कि जेल के अंदर ही एक ऐसी सुरंग तैयार हो चुकी है, जो कुछ कैदियों के लिए आजादी का रास्ता बनने वाली है। फिर अचानक सुबह खबर आई—जेल से कैदी फरार हैं। नेपाल के डोल्पा जिले के मुख्यालय दुनई स्थित जिला कारागार में शुक्रवार की रात ऐसा ही फिल्मी घटनाक्रम सामने आया। यहां बंद आठ कैदी जेल के भीतर से करीब 4 मीटर 63 सेंटीमीटर लंबी सुरंग खोदकर फरार हो गए। घटना सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जेल परिसर से लेकर आसपास के इलाकों तक छानबीन शुरू कर दी। मानो किसी फिल्म का सीन हो। लेकिन यह कोई फिल्म नहीं, बल्कि नेपाल की जेल में हुई असली घटना थी।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कैदियों ने जेल के अंदर से ही सुरंग तैयार की और उसी रास्ते से बाहर निकल गए। हालांकि सुरंग कैसे खोदी गई, इसमें कितने लोग शामिल थे और कैदियों ने इस पूरी योजना को कब से तैयार किया था, इन सवालों के जवाब अभी जांच में तलाशे जा रहे हैं। जिला पुलिस कार्यालय डोल्पा के डीएसपी अनिलराज गिरी के नेतृत्व में पुलिस टीम जेल पहुंची।
डीएसपी ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कैदी जेल के भीतर सुरंग बनाकर फरार हुए हैं। घटना की वास्तविक स्थिति और दूसरे तथ्यों की पुष्टि विस्तृत जांच और घटनास्थल के निरीक्षण के बाद ही हो सकेगी।फरार हुए आठ कैदियों में पांच ऐसे हैं, जिन्हें दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका था। एक कैदी चोरी के मामले में सजा काट रहा था, जबकि चोरी के आरोप में न्यायिक हिरासत में रखे गए दो विचाराधीन कैदी भी फरार होने में सफल रहे।अब सवाल है कि आखिर जेल के अंदर इतनी लंबी सुरंग तैयार होती रही और सुरक्षा में तैनात किसी व्यक्ति को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
पुलिस फरार कैदियों की तलाश में जुटी है। उनके संभावित ठिकानों और भागने के रास्तों की जानकारी जुटाई जा रही है। फरार कैदियों में रुकुम पश्चिम के आठबिसकोट नगरपालिका-10 निवासी राम बीके, डोल्पा के त्रिपुरासुंदरी नगरपालिका-7 निवासी काली प्रसाद रोकाया, त्रिपुरासुंदरी-4 निवासी हरि बहादुर बुढ़ा उर्फ धन बहादुर बुढ़ा, सल्यान के कुमाख ग्रामीण नगरपालिका-5 निवासी रेशम राणा और जाजरकोट के बारेकोट ग्रामीण नगरपालिका-1 निवासी यज्ञ बीके शामिल हैं। ये सभी दुष्कर्म के मामलों में दोषी करार दिए गए थे।लेकिन नेपाल में इस वक्त सिर्फ जेल ब्रेक ने ही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए हैं।
भारत-नेपाल सीमा के करीब एक दूसरी घटना ने भी लोगों को चौंका दिया है।रविवार को जोगबनी मुख्य सीमा से महज करीब आधा किलोमीटर दूर नेपाल के विराटनगर में जोरदार धमाका हुआ। दृश्य कुछ ऐसा था कि लोग सहम गए। विराटनगर महानगरपालिका के वार्ड नंबर 15 में जूट मिल के पीछे खाली जगह पर कचरे की सफाई चल रही थी। इसी दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। लोगों ने शायद कुछ पल के लिए समझा भी नहीं कि आखिर हुआ क्या है। धमाका इतना तेज था कि मौके पर अफरातफरी मच गई। इस घटना में स्थानीय निवासी 40 वर्षीय नजवा खातून और उनके 65 वर्षीय ससुर हैदर अली घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार नजवा खातून के दोनों हाथों और सीने पर चोटें आईं, जबकि हैदर अली के बाएं हाथ और दाहिने पैर में चोट लगी। दोनों को इलाज के लिए स्थानीय निजी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई।धमाके की खबर मिलते ही इलाका पुलिस कार्यालय रानी के सीनियर सब-इंस्पेक्टर राम प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची।अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है—कचरे के ढेर में आखिर ऐसा क्या था, जो धमाके में बदल गया?
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वहां बम जैसी सामग्री आखिर पहुंची कहां से। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही तकनीकी जांच की मदद से घटना की कड़ियां जोड़ने की कोशिश हो रही है।पुलिस ने घटना की जांच के लिए बम निरोधक दस्ते की भी मदद ली है। घटनास्थल और आसपास के इलाकों की बारीकी से जांच की जा रही है।एक तरफ जेल की दीवार के भीतर सुरंग खोदकर आठ कैदी फरार हो जाते हैं, तो दूसरी तरफ भारत-नेपाल सीमा से कुछ ही दूरी पर संदिग्ध विस्फोट दो लोगों को घायल कर देता है।दोनों घटनाओं ने नेपाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।अब निगाहें पुलिस की जांच पर हैं—जेल की सुरंग किसने और कब खोदी? कैदियों को बाहर निकलने में किसकी मदद मिली? और जोगबनी सीमा के पास धमाका करने वाली संदिग्ध सामग्री आखिर वहां पहुंची कैसे?