पटना :  नेपाल में आई प्रलयंकारी बाढ़ और वहां नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के बाद बिहार में भी खतरे की घंटी बज गई है। नेपाल से निकलकर बिहार में प्रवेश करने वाली नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। खासकर गंडक नदी को लेकर सरकार ने विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर संभावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और प्रभावित तथा संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया।

गंडक नदी से सीधे प्रभावित पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखा गया है। वहीं कोसी और बागमती नदी से जुड़े संवेदनशील इलाकों में भी विशेष चौकसी बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर समेत अन्य संभावित प्रभावित जिलों में प्रशासन को लगातार स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।

आधी रात के बाद घटा था पानी, सुबह फिर बढ़ने लगा गंडक का डिस्चार्ज

वाल्मीकिनगर गंडक बराज से मिले आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात जलस्राव में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी। शाम 7:30 बजे गंडक बराज पर करीब 1,04,400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसके बाद रात 9 बजे यह बढ़कर 1,26,500 क्यूसेक, रात 10 बजे 1,42,100 क्यूसेक और रात 11 बजे 1,50,200 क्यूसेक तक पहुंच गया।

हालांकि आधी रात के बाद जलस्राव में कमी देखी गई। रात 12:30 बजे डिस्चार्ज 1,42,100 क्यूसेक और रात 1 बजे करीब 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया। लेकिन गुरुवार सुबह एक बार फिर पानी के बहाव में बढ़ोतरी शुरू हो गई। 27 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजे वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर अपस्ट्रीम डिस्चार्ज 81,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। सुबह 7 बजे यह बढ़कर 92,900 क्यूसेक और सुबह 8 बजे 99,800 क्यूसेक पहुंच गया। लगातार बढ़ते जलस्राव को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी, कमजोर हिस्सों पर तुरंत कार्रवाई

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नेपाल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी तटबंधों और बांधों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि तटबंधों की मजबूती की लगातार जांच की जाए और जहां भी कोई कमजोर हिस्सा मिले, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही बांधों और तटबंधों पर विशेष नाइट पेट्रोलिंग कराने का आदेश दिया गया है।

संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नेपाल में बारिश और बाढ़ की स्थिति के आधार पर बिहार के लिए आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

लाउडस्पीकर से लोगों को किया जाएगा अलर्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील और संभावित प्रभावित इलाकों में लोगों को समय रहते सतर्क करना बेहद जरूरी है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को लाउडस्पीकर और माइक के माध्यम से लगातार सूचना प्रसारित करने का निर्देश दिया गया है।

लोगों को नदी किनारे और निचले इलाकों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। संभावित आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

पश्चिमी चंपारण में 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के निचले इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है। अब तक करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया है। वाल्मीकिनगर, बगहा-1, बगहा-2, पिपरासी, भितहा, मधुबनी, ठकराहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन विशेष निगरानी रख रहा है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है।

सरकार ने राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था की : मंत्री

इधर, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि बिहार सरकार संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक किचन, पशु चारा, सूखा राशन, चिकित्सीय सहायता और अन्य जरूरी राहत सामग्रियों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान को तत्काल तेज किया जाएगा। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नेपाल में बाढ़ की स्थिति और गंडक बराज पर लगातार बदलते जलस्राव के आंकड़ों को देखते हुए बिहार सरकार ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन की नजर अब नदी के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर टिकी हुई है।