NEET UG Paper Leak: पटना में NEET-UG प्रश्नपत्र लीक मामले में लंबे समय से चर्चा में रहे संजीव मुखिया को अदालत से बड़ी राहत मिली है. CBI की जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद विशेष अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया. संजीव मुखिया को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था.
NEET-UG पेपर लीक मामले में नाम सामने आने के बाद संजीव मुखिया जांच एजेंसियों के रडार पर थे. CBI ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की थी. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी थी कि प्रश्नपत्र लीक करने और उसे आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क में उनकी क्या भूमिका थी. जांच आगे बढ़ने के बाद CBI को उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले.
CBI ने दाखिल नहीं किया आरोपपत्र
सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि CBI ने संजीव मुखिया के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है. जांच एजेंसी ने उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ और अन्य स्तरों पर पड़ताल की, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई.
इसके बाद अदालत ने मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए संजीव मुखिया को न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया. अदालत की ओर से बंधपत्र स्वीकार किए जाने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया.
NEET-UG मामले में 45 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट
NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच के दौरान CBI ने कई आरोपितों की भूमिका की पड़ताल की है. रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी अब तक 45 आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है.
प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच CBI को सौंपी गई थी. केंद्रीय एजेंसी ने पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों की जांच की. इसमें प्रश्नपत्र के लीक होने से लेकर उसके आरोपितों तक पहुंचने और आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाने से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई.
इसी जांच के दौरान संजीव मुखिया की भूमिका भी एजेंसी के सामने आई थी. उनसे पूछताछ और रिमांड की कार्रवाई के बाद CBI ने उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की, लेकिन बाद में पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने की स्थिति सामने आई.
23 जून 2024 को CBI ने दर्ज की थी प्राथमिकी
NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI ने 23 जून 2024 को प्राथमिकी दर्ज की थी. यह मामला प्राथमिक आरसी-224/2024 के रूप में दर्ज हुआ था. वहीं बिहार पुलिस ने शास्त्रीनगर थाने में कांड संख्या 358/2024 दर्ज की थी.
मामले की शुरुआती जांच बिहार पुलिस ने की थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी. CBI ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद आरोपितों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की.
जांच के दौरान चर्चा में आया था संजीव मुखिया का नाम
NEET-UG पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद संजीव मुखिया का नाम प्रमुखता से चर्चा में आया था. जांच एजेंसी ने उनकी कथित भूमिका को लेकर पूछताछ की और रिमांड पर भी लिया था. ऐसे में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने की संभावना जताई जा रही थी.
हालांकि, जांच पूरी होने के बाद CBI को उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. इसी वजह से एजेंसी ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया. अब अदालत ने भी इसी स्थिति को देखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया है.
फिलहाल NEET-UG पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को अदालत से राहत मिली है. CBI की ओर से उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर उन्हें न्यायिक हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया गया है.