Bihar News : बिहार में सामने आए NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में गिरफ्तार 29 आरोपियों से 72 घंटे तक गहन पूछताछ करने के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में लखीसराय जेल भेज दिया। सभी आरोपियों को रविवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।


जानकारी के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान ईओयू की टीम ने सभी आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर कई चरणों में पूछताछ की। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, शामिल लोगों और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ना था।


डिजिटल साक्ष्यों की हुई गहन जांच

पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण किया। साथ ही आरोपियों के बयानों का भी आपस में मिलान किया गया, ताकि किसी भी तरह के विरोधाभास या नई जानकारी का पता लगाया जा सके।


सूत्रों के अनुसार, पूछताछ तेतरहाट थाना परिसर में की गई, जहां ईओयू के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। इस दौरान प्रत्येक आरोपी से अलग-अलग सवाल पूछे गए और जरूरत पड़ने पर आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई।


मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेशी

पूछताछ पूरी होने के बाद सभी आरोपियों की स्वास्थ्य जांच भी कराई गई। हालांकि उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय मेडिकल टीम को तेतरहाट थाना बुलाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया।


न्यायालय में पेशी के बाद कोर्ट ने सभी 29 आरोपियों को पुनः न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें वापस लखीसराय मंडल कारा भेज दिया गया।


कुछ आरोपियों ने तबीयत खराब होने का किया दावा

जांच के दौरान कुछ आरोपियों ने खुद को अस्वस्थ बताते हुए अस्पताल में भर्ती कराने की मांग भी की। बताया जा रहा है कि इनमें कथित साल्वर गिरोह से जुड़े कुछ लोग शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक आरोपी ने कई दिनों से भोजन नहीं करने की बात भी जांच अधिकारियों के सामने रखी।


हालांकि मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने आवश्यक परीक्षण किए और इसके बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।


जांच एजेंसियां जुटा रही हैं मजबूत साक्ष्य

ईओयू इस पूरे मामले में तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा में कथित धांधली किस स्तर तक फैली थी, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और इसका संचालन किस तरह किया गया।


माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच और आरोपियों के बयानों के आधार पर जांच में नए खुलासे हो सकते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले में अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा सकती है।


फिलहाल सभी 29 आरोपी न्यायिक हिरासत में लखीसराय जेल में हैं और आर्थिक अपराध इकाई पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी रखे हुए है।