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13-Mar-2026 09:51 AM
By First Bihar
Bihar News : पटना में चर्चित NEET छात्रा रेप और मौत मामले में बेउर जेल में बंद शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर अब फैसला आने वाला है। इस मामले में पटना की पोक्सो (POCSO) कोर्ट शुक्रवार को अपना निर्णय सुनाएगी।
गुरुवार को कोर्ट में इस मामले को लेकर करीब चार घंटे तक लंबी सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब आज यह साफ हो जाएगा कि आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिलती है या फिर उसे फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा।
दो दिन चली सुनवाई, जेल से कोर्ट लाया गया आरोपी
इस संवेदनशील मामले में लगातार दो दिनों तक सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मनीष रंजन को बेउर जेल से पटना की पोक्सो कोर्ट में पेश किया गयाअदालत में करीब चार घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लगभग दो घंटे की सुनवाई जज के चेंबर में हुई। इस दौरान कोर्ट ने केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
पीड़ित पक्ष ने किया जमानत का कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने मनीष रंजन की जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पटना हाईकोर्ट के फुल बेंच के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, इस दलील पर मनीष रंजन के वकील ने आपत्ति जताई और अपने मुवक्किल के पक्ष में दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
छात्रा की मां ने जांच एजेंसियों पर लगाए आरोप
इस मामले में पीड़ित छात्रा की मां ने CBI और SIT की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां मिलकर मामले की लीपापोती कर रही हैं। छात्रा की मां का कहना है कि मनीष रंजन का नाम तक ठीक से सामने नहीं लाया जा रहा और मामले में सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ही झूठा साबित करने की कोशिश हो रही है।
कोर्ट ने IO से पूछे कई अहम सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने केस की पहली जांच अधिकारी (IO) और चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि जब मुख्य गवाह, हॉस्टल की मेड और छात्रा के कमरे में जाने वाली उसकी सहपाठी से पूछताछ की गई थी, तो उनकी कैमरे पर रिकॉर्डिंग क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही अदालत ने यह भी पूछा कि मनीष रंजन पुलिस के पास कब आया था और उससे क्या पूछताछ की गई थी।
पूछताछ को लेकर पुलिस के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट
रौशनी कुमारी ने कोर्ट को बताया कि 10 जनवरी को मनीष रंजन थाने आया था। इस पर कोर्ट ने पूछा कि वह किस कारण से थाने आया था और उससे क्या पूछताछ की गई थी। इस सवाल के जवाब में रौशनी कुमारी ने बताया कि उससे पूछताछ नहीं की गई थी। कोर्ट ने आगे पूछा कि मनीष रंजन को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया और पूछताछ के दौरान क्या जानकारी सामने आई। साथ ही यह भी पूछा गया कि गिरफ्तारी के समय जांच में उसका क्या रोल पाया गया था।
अदालत ने जांच पर उठाए सवाल
अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया, तो पुलिस ने यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि मामले में उसकी भूमिका क्या है। इन सवालों के संतोषजनक जवाब जांच अधिकारी के पास नहीं थे, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी भी जताई।
अभियोजन पक्ष का दावा: मनीष रंजन ही मास्टरमाइंड
अदालत ने इसके बाद स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर (PP) से पूछा कि पुलिस की जांच में मनीष रंजन की क्या भूमिका सामने आई है। इस पर पीपी ने कोर्ट को बताया कि मनीष रंजन इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड है। उन्होंने कहा कि वह न केवल शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का मालिक है, बल्कि हॉस्टल का सह-संचालक भी है और घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं में उसकी भूमिका सामने आई है।
आज आएगा कोर्ट का फैसला
अब इस मामले में सभी की नजर पटना पोक्सो कोर्ट के फैसले पर टिकी है। अदालत आज यह तय करेगी कि आरोपी मनीष रंजन को जमानत दी जाए या फिर उसे फिलहाल जेल में ही रहना होगा। इस फैसले को मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।