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28-Feb-2026 04:40 PM
By First Bihar
PATNA: नाबालिग NEET छात्रा से जुड़े चर्चित मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आया कि जब पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी, तब पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया। शनिवार 28 फरवरी को काफी देर तक सुनवाई हुई। करीब 11:15 बजे से सुनवाई शुरू हुई जो 3:45 तक लगातार नॉनस्टॉप 3 घंटे से ज्यादा समय तक चली। सीबीआई की ओर से इस केस के आईओ एसपी रैंक के अधिकारी श्रीवास्तव से कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अदालत ने इस संबंध में उनसे लिखित जवाब भी मांगा है।
करीब तीन घंटे से अधिक चली सुनवाई में कोर्ट ने उन सभी दस्तावेजों का अवलोकन किया, जो एसआईटी और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत किए गए थे। न्यायालय ने जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया और सीबीआई से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण भी मांगा। मामले की अगली सुनवाई सोमवार 2 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आगे की कार्रवाई सुनवाई के बाद तय की जाएगी। इस मामले से जुड़े पक्षकारों का कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि निष्पक्ष सुनवाई के बाद न्याय मिलेगा। मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा टिप्पणी करने से पीड़ित पक्ष के वकील ने इनकार किया है।
पीड़ित पक्ष के वकील एस के पांडेय ने मीडिया से बातचीत को दौरान बताया कि कोर्ट ने सभी पक्षों की बातें को गंभीरता से सुनने के बाद सीबीआई के आईओ श्रीवास्तव से पूछा कि मनीष रंजन को जमानत दे दी जाए? उन्हें कस्टडी में रखने की आवश्यकता है या नहीं है? सीबीआई के IO श्रीवास्तव ने कहा कि मनीष रंजन को कस्टडी में रखने का कोई औचित्य नहीं है। जमानत यदि दे दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अदालत ने सीबीआई के आईओ श्रीवास्तव से कहा कि आप लिखित में इन बातों को दीजिए। जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख सोमवार को निर्धारित की।
सूचक के अधिवक्ता एसके पांडेय ने आगे बताया कि सीबीआई जांच के नाम पर इस केस की लीपापोती कर रही है। मृतका के स्कूल सर्टिफिकेट के मुताबिक उसकी उम्र 17 साल कुछ महीने ही पाया गया हैं लेकिन सीबीआई के आईओ श्रीवास्तव जी ने इस केस में बॉक्सो की धारा नहीं लगाई है। जब भी किसी नाबालिग बच्ची के साथ कुछ गलत होता है तो कानूनन उसमें पॉक्सो की धाराएं लगती है। अदालत ने उनसे लिखित में जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए इससे ज्यादा वे कुछ नहीं बता सकते हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि अदालत की सुनवाई चल रही है। अदालत की सुनवाई पर भरोसा रखिये।
उन्होंने कहा कि जहानाबाद की एक बेटी डॉक्टर बनने का सपना लेकर पटना आती है जहां उसके साथ बलात्कार होता है, उसकी हत्या होती है। उसके स्कूल सर्टिफिकेट के मुताबिक वह माइनर है। इस बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई हम अंतिम सांसों तक लड़ेंगे। पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि सीबीआई के द्वारा भयंकर तरीके से मामले की लीपापोती की जा रही है। सीबीआई नहीं चाहती कि इसमें इंसाफ हो। जो असली गुनाहगार है उसे बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। यह सिर्फ कोशिश नहीं है बल्कि यह एक आपराधिक षड्यंत्र है। देश की बेटियों से भी अपील करना चाहूंगा कि अदालत पर भरोसा रखिये।इस देश का कानून अभी जिंदा है। अदालत को अपना काम करने दीजिए। देश की बेटियों को मैं या विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं अपने अंतिम सांसों तक इस मुकदमे को लडूंगा। इंसाफ के लिए तमाम वो कोशिश करूंगा जिससे की मृतका को न्याय मिल सके।
क्या है पूरा मामला?
जहानाबाद की छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट यानि मेडिकल की तैयारी कर रही थी। 05 जनवरी को छात्रा गर्ल्स हॉस्टल में बेसुध हालत में मिली थी। अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजनों ने हॉस्टल संचालक और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हत्या और दुष्कर्म की आशंका जताई। 09 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने छात्रा के पिता के फर्द बयान पर मामला दर्ज किया था। परिजनों ने बताया था कि मृतका हॉस्टल में बेहोश मिली थी। पिता ने बेटी के शरीर पर चोट के निशान की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किए जाने का भी शक जाहिर किया था। इलाज के दौरान छात्रा की मौत अस्पताल में हो गई थी। मौत के बाद पटना में काफी हंगामा के बाद राज्य सरकार ने 31 जनवरी को मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद सीबीआई अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
फर्स्ट बिहार के लिए पटना से सूरज कुमार की रिपोर्ट