Bihar School News :  मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड से सरकारी स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। पटसारा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में स्कूली बच्चों से किताबों के बंडल ढुलवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है और प्रभारी प्रधानाध्यापिका से स्पष्टीकरण मांगा गया है।


जानकारी के अनुसार, गुरुवार को प्रखंड मुख्यालय स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) से कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया था। इन किताबों को संबंधित विद्यालय तक पहुंचाने के लिए पिकअप वाहन का उपयोग किया गया। आरोप है कि जब किताबों से लदी गाड़ी स्कूल परिसर पहुंची, तो उन्हें उतारने के लिए किसी मजदूर या सहायक कर्मी की व्यवस्था नहीं की गई। इसके बजाय विद्यालय में पढ़ रहे छोटे-छोटे बच्चों को ही इस कार्य में लगा दिया गया।


वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूली ड्रेस पहने बच्चे चिलचिलाती धूप में पिकअप वाहन से किताबों के भारी बंडल उतार रहे हैं। कई बच्चे इन बंडलों को अपने सिर पर रखकर स्कूल के कमरों तक ले जाते नजर आ रहे हैं। यह पूरी घटना स्कूल के निर्धारित शैक्षणिक समय के दौरान हुई, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हुई।


इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों में आक्रोश है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि इस तरह के शारीरिक कार्य कराने के लिए। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही और बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।


मामला तूल पकड़ने के बाद प्रखंड प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया है। बंदरा की बीडीओ सह प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) आमना वसी ने बताया कि बच्चों से इस प्रकार का शारीरिक श्रम कराना पूरी तरह से प्रतिबंधित है और यह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से प्रभारी प्रधानाध्यापिका निशा कुमारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


जारी नोटिस में प्रधानाध्यापिका से दो दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस मामले की जांच भी कराई जाएगी, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।


शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में बच्चों से श्रम कराना न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह बाल श्रम निषेध कानून के भी खिलाफ है।


इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है।


फिलहाल, पूरे मामले में सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जाते हैं। इस बीच, अभिभावकों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूलों में बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार दोबारा न हो।