Bihar News: बिहार के मुंगेर जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आमदनी बढ़ाने के लिए बड़ी योजना तैयार की गई है। जिले के 195 जलक्षेत्रों को वेटलैंड क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत छोटे-छोटे मत्स्यपालकों को सहकारिता से जोड़कर संगठित किया जाएगा। साथ ही उन्हें आधुनिक तकनीक, सरकारी सब्सिडी और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इस पहल से मछली उत्पादन बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।




इस योजना के तहत मुंगेर जिले के सभी नौ प्रखंडों में पैक्स स्तर पर विशेष फिशरी क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। इसके लिए मत्स्य पालन सहयोग समितियों का गठन किया जाएगा। पहले से गठित समितियों को भी सक्रिय और मजबूत बनाने की योजना है। सहकारिता विभाग के माध्यम से पहली बार इस तरह की पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य छोटे मत्स्यपालकों को एक मंच पर लाकर उन्हें सामूहिक रूप से मछली पालन और कारोबार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।




वेटलैंड क्लस्टर के माध्यम से जलक्षेत्रों का सामूहिक प्रबंधन किया जाएगा। इसमें आधुनिक तकनीक से मछली पालन, उत्पादन बढ़ाने और बाजार में बेहतर कीमत दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस व्यवस्था से छोटे मत्स्यपालकों की बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकेगी। साथ ही उन्हें अपनी मछलियां बेहतर कीमत पर बेचने और सामूहिक रूप से आर्थिक लाभ हासिल करने का अवसर मिलेगा।




मुंगेर जिले में मुख्य रूप से रेहु और कतला मछली का पालन किया जाता है। बेहतर वृद्धि और बाजार में अच्छी मांग के कारण मत्स्यपालक इन प्रजातियों को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा मृगल, पंगास और कॉमन कार्प मछलियों का भी पालन किया जा रहा है। वेटलैंड क्लस्टर विकसित होने से इन सभी प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।




हवेली खड़गपुर झील को जिले के बड़े वेटलैंड क्लस्टर के रूप में चिह्नित किया गया है। योजना के तहत झील के जलक्षेत्र का बेहतर प्रबंधन कर इसे स्थानीय मछुआरों के लिए रोजगार और आमदनी का प्रमुख साधन बनाने पर जोर दिया जाएगा। जलस्रोतों के पुनर्जीवन और मत्स्य उत्पादन में बढ़ोतरी से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।




वेटलैंड क्लस्टर योजना को जमीन पर उतारने के लिए सहकारिता विभाग ने शुरुआती पहल शुरू कर दी है। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और पैक्स अध्यक्षों को इच्छुक मत्स्यपालकों के समूह बनाने के निर्देश दिए गए हैं।




योजना के तहत मत्स्यपालकों को सहकारिता के दायरे में लाकर सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ दिलाने की तैयारी है। इससे मुंगेर में मत्स्य पालन को व्यवस्थित कारोबार के रूप में विकसित करने और मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।