Bihar News: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने जमुई और समस्तीपुर में नाबालिग लड़कियों से जुड़ी घटनाओं को लेकर बिहार सरकार पर हमला बोला है. पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने इन घटनाओं को शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को दूसरों पर सवाल उठाने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.


मुकेश सहनी ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बिहार ही नहीं, पूरे देश की छवि प्रभावित होती है. उन्होंने घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. सहनी ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर अपराधियों के भीतर पुलिस-प्रशासन का भय कम हुआ है और सरकार अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने में ज्यादा व्यस्त है.


सहनी ने बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई जगह सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति खराब है, लेकिन सरकार इन समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है.


उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता की मूल समस्याओं से ध्यान हटाती है तो समाज में अराजकता की स्थिति पैदा होती है. सहनी ने सरकार से कानून-व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करने की मांग की.


बिहार में बाढ़ की स्थिति का जिक्र करते हुए सहनी ने आरोप लगाया कि आम लोग बाढ़ से परेशान हैं, जबकि सरकार और उसके नेता जश्न में व्यस्त हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर हुए आयोजनों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा.


सहनी का आरोप है कि जनता की परेशानियों के बीच सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया गया. उन्होंने कहा कि बाढ़ और दूसरी समस्याओं से प्रभावित लोगों की परेशानियों पर सरकार को ध्यान देना चाहिए.


मुकेश सहनी ने बिहार सरकार की चुनावी घोषणाओं पर भी सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम समय में महिलाओं के खातों में पैसे भेजने और मुफ्त बिजली जैसी घोषणाओं के जरिए जनता को प्रभावित करने की कोशिश की गई.


उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को अपने अधिकारों और सरकार की नीतियों को समझना होगा. सहनी ने लोगों से जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है.


शराबबंदी के मुद्दे पर सहनी ने कहा कि यदि सरकार शराब की बिक्री शुरू करने का फैसला करती है तो उसके दूरगामी प्रभावों पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और अपराध जैसी समस्याओं का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर प्रशासन की जरूरत है.


कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सहनी ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अपराधियों के भीतर पुलिस-प्रशासन का पर्याप्त भय नहीं है. सहनी ने यह भी आरोप लगाया कि जाति देखकर कार्रवाई या न्याय करने की प्रवृत्ति लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.


चुनाव आयोग को लेकर भी मुकेश सहनी ने गंभीर आरोप लगाए. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और हिंसक टिप्पणी की. बाद में उन्होंने अपने बयान में संविधान और लोकतंत्र का हवाला देते हुए कहा कि वह संविधान को मानने वाले लोग हैं.


सहनी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग भाजपा का आयोग बन चुका है. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों पर जनता को जागरूक होना होगा.