‎पटना: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी आज रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन में महर्षि वेद व्यास ट्रस्ट द्वारा आयोजित महर्षि वेद व्यास पूजा सह जयंती समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ लोगों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

‎अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य समझा जाए। उन्होंने कहा कि महर्षि वेद व्यास का यह आयोजन पूरे समाज का आयोजन है और इसके लिए किसी औपचारिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। 


उन्होंने कहा कि जब तक वे बिहार में रहेंगे, हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होने का प्रयास करेंगे। उन्होंने आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को जीवित रखने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‎मुकेश सहनी ने बच्चों और युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब नई पीढ़ी शिक्षित, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सजग हो। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में जब भी लोकतंत्र पर संकट आया है, तब युवाओं और छात्रों ने परिवर्तन का नेतृत्व किया है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भी जागरूक रहने की अपील की।

‎उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है और चुनाव किसी नेता का नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों का उत्सव है। जनता जिस व्यक्ति को चुनेगी, वही सत्ता में बैठेगा और यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता के लिए काम नहीं करता है तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता को अपने वोट की ताकत पहचाननी होगी और अच्छे कार्यों का समर्थन करने के साथ-साथ गलत नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी करना चाहिए।

‎मुकेश सहनी ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा और एकजुटता है। उन्होंने लोगों से अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज तभी मजबूत होगा जब लोग आपसी भाईचारे के साथ संगठित रहेंगे। 

'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ‎ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और मेहनत की बदौलत ही वे गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज को गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करना होगा।

‎पूर्व मंत्री ने कहा कि आज भी समाज का बड़ा वर्ग आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अनेक युवाओं को शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद रोजगार नहीं मिल रहा है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारों की प्राथमिकता जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाने, रोजगार सृजन करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की होनी चाहिए। उन्होंने समाज से एकजुट रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

‎कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुकेश सहनी ने आंदोलनकारियों पर गोली चलाने की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें जनता की आवाज सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने सरकार को आईना दिखाया है और सत्ता में बैठे लोगों को जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए आत्ममंथन करना चाहिए।