मोकामा/पटना: बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने पटना जिले के मोकामा प्रखंड के दियारा इलाके में भारी तबाही मचानी शुरू कर दी है। रविवार की रात गंगा की तेज धार ने कसहा दियारा पंचायत की करीब 5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क के एक बड़े हिस्से को अपने साथ बहा दिया। सड़क के अचानक ध्वस्त होने से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सड़क टूटने के बाद पंचायत के हजारों लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कसहा दियारा पंचायत की यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। इसी मार्ग से ग्रामीण पटना से बेगूसराय जिले की ओर आवागमन करते थे। इसके अलावा पंचायत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने के लिए भी यही मुख्य रास्ता था। गंगा की तेज धारा में सड़क का बड़ा हिस्सा बह जाने के बाद अब लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो गई है।
गंगा की धार में समा गई सड़क
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ समय से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी की धार भी तेज होती गई। रविवार की रात पानी के दबाव और तेज कटाव के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर गंगा में समा गया। सड़क के ध्वस्त होते ही आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का यह हिस्सा इलाके के लिए लाइफलाइन की तरह था। इसी रास्ते से लोग बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचते थे। सड़क टूटने के बाद अब लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ने की आशंका है।
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा सीधा असर
सड़क के टूटने का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, इससे जरूरी सामान की आवाजाही, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों के स्कूल जाने और अन्य दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। दियारा क्षेत्र में पहले से ही बाढ़ और कटाव के कारण लोगों को हर साल मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मुख्य सड़क का टूट जाना ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क टूटने से पंचायत के कई हिस्सों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। यदि जल्द ही वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ सकती है।
5 करोड़ रुपये की लागत पर उठे सवाल
ग्रामीणों के बीच इस सड़क के निर्माण में खर्च हुई राशि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सड़क के निर्माण पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ऐसे में उनका सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क कुछ वर्षों तक भी क्यों नहीं टिक सकी?
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और बाढ़ से बचाव के इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दियारा क्षेत्र में गंगा के कटाव का खतरा हर साल बना रहता है। इसके बावजूद सड़क के किनारे कटावरोधी उपायों को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो शायद सड़क को इस तरह बहने से बचाया जा सकता था। हालांकि, सड़क निर्माण में तकनीकी खामी या गुणवत्ता से जुड़ी कोई आधिकारिक जांच या रिपोर्ट सामने आई है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
बाढ़ और कटाव ने बढ़ाई प्रशासन की चुनौती
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच सड़क का ध्वस्त होना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है। एक ओर नदी का जलस्तर बढ़ रहा है तो दूसरी ओर कटाव तेजी से हो रहा है। ऐसे में तत्काल राहत और वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करना जरूरी हो गया है।
ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मौके पर अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाए। साथ ही सड़क के टूटे हिस्से के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि कोई हादसा न हो। लोगों ने वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने और कटावरोधी कार्य जल्द शुरू कराने की भी मांग की है।
सिर्फ सड़क नहीं, व्यवस्था पर भी सवाल
कसहा दियारा में सड़क का गंगा की तेज धार में बह जाना सिर्फ एक सड़क के टूटने की घटना नहीं है। इसने दियारा क्षेत्रों में बाढ़ और कटाव से निपटने की सरकारी तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क यदि तेज जलधारा के सामने इतनी जल्दी कमजोर पड़ जाती है तो निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी की जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया जाएगा और आवागमन बहाल करने के साथ-साथ गंगा के कटाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर न हो, इसके लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।