पटना: बिहार के पटना जिले के मोकामा प्रखंड के दरियापुर गांव में शुक्रवार को गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। काली स्थान घाट पर नहाने गए दो किशोर गहरे पानी में डूब गए, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोगों ने एक बार फिर मोकामा में SDRF की स्थायी तैनाती की मांग उठाई है।
मिली जानकारी के अनुसार, दरियापुर गांव के 12 वर्षीय मोहम्मद रेहान और 15 वर्षीय मोहम्मद जैद शुक्रवार को अन्य बच्चों के साथ गंगा स्नान करने काली स्थान घाट पहुंचे थे। स्नान के दौरान दोनों का पैर फिसल गया और वे गंगा किनारे बने एक गहरे गड्ढे में चले गए। देखते ही देखते दोनों पानी में डूबने लगे।
घटना के समय वहां मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सूचना दी। आवाज सुनते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घाट पर पहुंचे और दोनों बच्चों की तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने दोनों को पानी से बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने दोनों बच्चों की जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के इस बयान के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। गांव में हर तरफ मातम का माहौल है और लोगों की आंखें नम हैं। दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
घटना की जानकारी मिलते ही हाथीदह थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल, बाढ़ भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि मोकामा क्षेत्र में गंगा घाटों पर लगातार डूबने की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा के स्थायी इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं। उनका आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से मोकामा में SDRF की स्थायी टीम तैनात करने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मोकामा प्रखंड में डूबने से 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद घाटों पर न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही बचाव दल की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर प्रशिक्षित बचाव दल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
स्थानीय लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि मोकामा में SDRF की स्थायी तैनाती जल्द से जल्द की जाए। साथ ही गंगा घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक स्थानों की पहचान कर बैरिकेडिंग की जाए और स्नान के दौरान सुरक्षा कर्मियों की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए।
यह घटना एक बार फिर गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और किनारों पर गहरे गड्ढे बनने से ऐसे हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। विशेषज्ञ भी लोगों से अपील करते हैं कि नदी में स्नान करते समय सतर्क रहें, बच्चों को अकेले गहरे पानी में न जाने दें और केवल सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करें।
मोकामा के दरियापुर गांव में हुई इस दर्दनाक घटना ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। अब स्थानीय लोगों की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।