Bihar Cabinet Expansion 2026 : बिहार की राजनीति से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मंगल पांडे इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाएंगे। पार्टी ने इस बार नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति बनाई है, जिसके तहत कई नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा तेज हो गई है।


सूत्रों के अनुसार भाजपा ने ब्राह्मण कोटे से इस बार दो नए चेहरों पर भरोसा जताया है। इस बार झंझारपुर से विधायक नीतीश मिश्रा का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। इसके साथ ही भाजपा नेता मिथिलेश तिवारी को भी मंत्री पद दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी मिथिला और ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत संदेश देने के लिए यह बड़ा फैसला लेने जा रही है।


इसी रणनीति के तहत लंबे समय से भाजपा का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले मंगल पांडे का नाम संभावित मंत्रियों की सूची से बाहर कर दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने यह चर्चा काफी तेज हो चुकी है।


वहीं भूमिहार समाज से भी भाजपा ने इस बार मजबूत प्रतिनिधित्व देने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा इंजीनियर शैलेंद्र को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि भाजपा सामाजिक संतुलन के साथ-साथ क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधने में जुटी हुई है।


राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा इस बार काफी सोच विचार कर कैबिनेट का गठन कर रही है। पार्टी ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जिनका प्रभाव अलग-अलग जातीय समूहों और क्षेत्रों में मजबूत हो। खासकर मिथिलांचल, मगध और सीमांचल क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।


मंगल पांडे का नाम हटने की खबर ने भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हलचल बढ़ा दी है। मंगल पांडे लंबे समय से बिहार बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं और संगठन से लेकर सरकार तक उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भी उन्होंने अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं। ऐसे में उनका मंत्रिमंडल से बाहर होना राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत माना जा रहा है।


हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नए चेहरों और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान और मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।अब सभी की नजरें गांधी मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि भाजपा ने किन नेताओं पर भरोसा जताया है और किसे इस बार सत्ता में जगह नहीं मिल पाई है।