Political News : देश इस समय महंगाई, वैश्विक आर्थिक दबाव और संसाधनों की कमी जैसी कई बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे हालात में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे गैरजरूरी खर्चों से बचें, सोने की खरीदारी कम करें और ईंधन बचत को अपनी प्राथमिकता बनाएं। पीएम की इस अपील के बाद अब राज्यों की सरकारें भी एक्शन मोड में दिखाई देने लगी हैं। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।


दरअसल, अब कोई भी मंत्री मुख्यमंत्री की मंजूरी के बिना सरकारी विमान या चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। राज्य सरकार की ओर से जारी नए निर्देशों ने मंत्रियों की ‘हवाई सैर’ पर सख्त रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि यह फैसला सरकारी खर्चों में कटौती और ईंधन बचत अभियान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।


सूत्रों के मुताबिक, कई मंत्री छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए भी सरकारी विमान का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। अब सरकार ने तय किया है कि सिर्फ बेहद जरूरी सरकारी कामों के लिए ही विमान की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। मंजूरी मिलने के बाद ही विमान उपलब्ध कराया जाएगा। यह आदेश फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने लागू किया है।


नई व्यवस्था के तहत कोई भी मंत्री, अधिकारी या वीआईपी सीधे विमान बुक नहीं कर सकेगा। पहले यात्रा का कारण बताया जाएगा, फिर मुख्यमंत्री कार्यालय उसकी समीक्षा करेगा। अगर यात्रा जरूरी मानी गई, तभी सरकारी विमान उड़ान भरेगा। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम बढ़ते खर्च और जनता के बीच बन रही नकारात्मक छवि को देखते हुए उठाया है।


राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी द्वारा खर्च नियंत्रण और संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की अपील के बाद कई राज्यों पर दबाव बढ़ा है कि वे भी फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़े फैसले लें। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम उसी दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब दूसरे राज्यों की सरकारों पर भी नजरें टिक गई हैं कि वे वीआईपी सुविधाओं में कटौती को लेकर क्या फैसला लेती हैं।


हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। सरकार समर्थक इसे जनता के पैसे की बचत और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि इससे मंत्रियों के कामकाज और प्रशासनिक गति पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार दिखावटी सख्ती कर रही है, जबकि असली फिजूलखर्ची दूसरे विभागों में जारी है।


फिलहाल महाराष्ट्र सरकार का यह आदेश पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। आम जनता के बीच भी यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जब देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा हो, तब नेताओं और मंत्रियों को भी सादगी अपनानी चाहिए। अब देखने वाली बात होगी कि यह फैसला सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या सच में मंत्रियों की ‘हवाई राजनीति’ पर लगाम लगती है।