मधुबनी: बिहार में एक बार फिर ट्रेन को बेपटरी करने की खतरनाक साजिश सामने आई है। झंझारपुर-लौकहा रेलखंड के महरैल स्टेशन पर मंगलवार अलसुबह बदमाशों ने रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट का भारी स्लैब रख दिया। इसी ट्रैक से लौकहा बाजार से आनंद विहार जा रही 04013 स्पेशल ट्रेन गुजरने वाली थी। गनीमत रही कि लोको पायलट की नजर समय रहते पटरी पर पड़े स्लैब पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती तो बड़ा रेल हादसा हो सकता था।


घटना, सुबह करीब साढ़े तीन बजे की है। ट्रेन महरैल स्टेशन के लाइन नंबर एक से गुजर रही थी। इसी दौरान फुट ओवरब्रिज के पास लोको पायलट उपेंद्र भंडारी ने रेलवे ट्रैक पर कंक्रीट बेंच का एक भारी स्लैब पड़ा देखा। खतरे को भांपते ही उन्होंने बिना देर किए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। ट्रेन स्लैब से करीब 50 फीट पहले रुक गई। इस तरह लोको पायलट की सतर्कता ने सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ने से बचा ली।


ट्रेन के अचानक रुकने से यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। वहीं घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी, आरपीएफ और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। रेलकर्मियों ने सबसे पहले ट्रैक से स्लैब हटाया। इसके बाद पूरे इलाके की सुरक्षा जांच की गई और कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी दी गई। जांच पूरी होने के बाद सुबह करीब 3:44 बजे ट्रेन को सुरक्षित तरीके से आगे रवाना किया गया।


खास बात यह है कि 04013 स्पेशल ट्रेन का महरैल स्टेशन पर ठहराव भी नहीं था। घटना के समय स्टेशन का प्लेटफॉर्म भी लगभग सूना था। ऐसे में रेलवे ट्रैक पर इतना बड़ा कंक्रीट का स्लैब रखा जाना गंभीर सुरक्षा सवाल खड़े करता है। पुलिस और आरपीएफ ने मामले की जांच शुरू करते हुए रुद्रपुर थाना क्षेत्र के महरैल कर्णपुर चौक निवासी असमत अंसारी और एक नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ट्रेन को निशाना बनाने के पीछे क्या मकसद था और इस साजिश में उनके साथ कोई और लोग भी शामिल थे या नहीं।


यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि झंझारपुर-लौकहा और लोहना-झंझारपुर-निर्मली रेलखंड पर रेलवे सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ महीने पहले झंझारपुर-निर्मली रेलखंड के तमुरिया स्टेशन के पास भी ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश सामने आई थी। अब महरैल स्टेशन पर हुई घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।


करीब 70 किलोमीटर लंबे इन रेलखंडों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल हैं। जानकारी के मुताबिक, इतने बड़े नेटवर्क की निगरानी का जिम्मा सीमित संख्या में अधिकारियों और आरपीएफ जवानों पर है। बल की कमी के कारण रेलवे ट्रैक और स्टेशनों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से हो पा रही है, यह बड़ा सवाल है।


सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इन दोनों रेलखंडों पर राजकीय रेल पुलिस यानी जीआरपी का कोई थाना या चौकी नहीं है। यहां जीआरपी के अधिकारी या जवानों की स्थायी तैनाती भी नहीं है। ऐसे में अगर ट्रेन में किसी यात्री के साथ आपराधिक घटना हो जाए या रेलवे क्षेत्र में कोई गंभीर वारदात सामने आए तो तत्काल पुलिस सहायता हासिल करना मुश्किल हो जाता है। शिकायत दर्ज कराने के लिए यात्रियों को करीब 50 किलोमीटर दूर दरभंगा रेल थाना तक जाना पड़ता है।


महरैल की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रेलवे ट्रैक की सुरक्षा सिर्फ हादसा होने के बाद जांच तक सीमित रहेगी या पहले से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस इंतजाम किए जाएंगे। फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पूछताछ में इस खतरनाक साजिश के पीछे की पूरी कहानी क्या सामने आती है।