BIHAR NEWS : बिहार सरकार में मध्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद मंत्री मदन साहनी ने साफ कर दिया है कि राज्य में शराबबंदी कानून को और सख्ती से लागू किया जाएगा। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि राज्य में पूरी तरह प्रभावी शराबबंदी लागू नहीं हो सकी है।
मंत्री ने स्वीकार किया कि बिहार में अभी भी अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि- हम तो पहले ही बता चुके हैं यह कोई साधारण काम नहीं हैं और इसको रोकना सबका फर्ज है।जब कानून बना हुआ है तो उसका पालन होना चाहिए, अब इसको पालन करवाना है लेकिन इसको पालन करवाने में हमलोग पूरी तरह से सफल नहीं हुए हैं। राज्य के बाहर से शराब की तस्करी और बिहार में चोरी-छिपे शराब का निर्माण सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विभाग अब और अधिक सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और पुलिस व उत्पाद विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर बड़े अभियान चलाए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी प्राथमिकता होगी कि शराब तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगे और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि कानून लागू करने में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार चाहती है कि बिहार में शराबबंदी का उद्देश्य पूरी तरह सफल हो और इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में मदन साहनी ने कहा कि उन्हें जिस विभाग की जिम्मेदारी मिली है, वह बिहार सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है।उन्होंने कहा कि उनकी पूरी कोशिश होगी कि विभाग में जहां भी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाए और कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
मदन साहनी ने कहा कि शराबबंदी कानून को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून किसी हालत में खत्म नहीं होगा। सरकार इस कानून को पूरी मजबूती के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और परिवारों की खुशहाली के लिए शराबबंदी बेहद जरूरी है और सरकार इसे सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही विभागीय अधिकारियों के साथ बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में राज्यभर में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जहां-जहां लापरवाही या कमजोर कार्रवाई की शिकायतें मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।