Land For Jobs Case : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज, 30 सितंबर को बिहार की राजनीति से जुड़े चर्चित लैंड फॉर जॉब्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम सुनवाई होने जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े इस मामले में अदालत यह तय कर सकती है कि आरोपियों के खिलाफ Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत आरोप तय किए जाएं या नहीं। इससे पहले 29 अगस्त को अदालत ने अपना फैसला टाल दिया था। ऐसे में आज की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


मामले में लालू प्रसाद यादव की राउज एवेन्यू कोर्ट में वर्चुअल पेशी हुई। सुनवाई के दौरान अदालत में जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और मामले से जुड़ी दलीलों पर विचार किया गया। आरोप तय करने का सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि इसके बाद मामला मुकदमे की अगली प्रक्रिया की ओर बढ़ सकता है।


दरअसल, पूरा मामला उस कथित लैंड फॉर जॉब्स स्कैम से जुड़ा है, जिसकी जांच CBI और ED कर रही हैं। आरोप है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। CBI ने इन्हीं आरोपों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने CBI की FIR को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।


ED का आरोप है कि रेलवे में नौकरी पाने वाले कुछ उम्मीदवारों के परिवारों से जमीन बेहद कम कीमत पर लालू यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कराई गई। जांच एजेंसी ने इन संपत्तियों को कथित अपराध से हुई आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से जोड़ते हुए कई लेन-देन की पड़ताल की है। जांच के दौरान लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों का नाम भी सामने आया। ED ने AK Infosystems जैसी कंपनियों और उनसे जुड़े जमीन के लेन-देन की जांच की। एजेंसी का आरोप है कि कुछ संपत्तियां कंपनियों के माध्यम से रखी गईं और बाद में इन कंपनियों का नियंत्रण लालू परिवार के सदस्यों तक पहुंचा।


ED ने यह भी दावा किया है कि कई जमीन सौदे कथित तौर पर उस समय की वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम कीमत पर किए गए। वर्ष 2023 में जांच के दौरान एजेंसी ने छापेमारी की थी। ED के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब एक करोड़ रुपये नकद और लगभग 1.25 करोड़ रुपये के आभूषण व अन्य कीमती सामान जब्त किए गए। इसके अलावा करीब 6.02 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अटैच किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इस मामले में लालू परिवार के करीबी बताए गए कारोबारी अमित कात्याल की गिरफ्तारी भी हुई थी। उन्हें नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद ED ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए अदालत में अभियोजन शिकायत यानी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की।


ED ने जनवरी 2024 में पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी। इसमें राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अमित कात्याल समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद अगस्त 2024 में एजेंसी ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की। इसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। सितंबर 2024 में कोर्ट ने इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया था।


ED के मुताबिक, जांच के दायरे में वे लोग भी आए, जिन्होंने कथित तौर पर नौकरी पाने के बदले अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों को नाममात्र की कीमत पर बेची थी।अब 30 सितंबर की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि इस मामले में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। अदालत का आदेश आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। हालांकि, आरोप तय होना किसी आरोपी को दोषी ठहराया जाना नहीं है। मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत में होने वाली पूरी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।