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15-Mar-2026 07:45 AM
By First Bihar
Bihar Politics : नौकरी के बदले जमीन से जुड़े कथित धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राउज एवेन्यू कोर्ट में बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने कहा है कि पूर्व रेल मंत्री Lalu Prasad Yadav के परिवार ने कथित तौर पर रिश्वत के पैसों से अचल संपत्तियां अर्जित कीं। इस मामले में अदालत फिलहाल आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है।
ईडी ने इस मामले में Lalu Prasad Yadav, Rabri Devi, Tejashwi Yadav सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोप तय करने के लिए उसके पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मामले की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो कथित साजिश की ओर इशारा करते हैं।
ईडी के अनुसार यह पूरा मामला उस समय से जुड़ा है जब Lalu Prasad Yadav केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। एजेंसी का आरोप है कि उस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले कुछ लोगों से जमीन ली गई। जांच एजेंसी का कहना है कि यह जमीन सीधे तौर पर लालू परिवार के नाम पर नहीं ली गई, बल्कि इसे एक कंपनी के जरिए हासिल किया गया।
ईडी के मुताबिक साजिश के तहत पहले एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के शेयर हासिल किए गए। इसके बाद धीरे-धीरे इस कंपनी पर लालू परिवार का नियंत्रण स्थापित हो गया। एजेंसी का दावा है कि जिन लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई, उनसे जमीन लेकर उसे इस कंपनी के नाम पर दर्ज कराया गया। बाद में इस कंपनी के जरिए संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि इस तरह जमीन और संपत्ति हासिल करने की पूरी प्रक्रिया एक योजनाबद्ध तरीके से की गई थी ताकि सीधे तौर पर रिश्वत या संपत्ति हस्तांतरण का आरोप परिवार पर न आए। ईडी का कहना है कि यह मामला सिर्फ नियुक्तियों में अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित रूप से धन शोधन का भी पहलू जुड़ा हुआ है।
एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि एके इंफोसिस्टम कंपनी का संबंध कारोबारी अमित कात्याल से बताया जाता है। जांच के दौरान सामने आया कि अमित कात्याल कथित तौर पर लालू परिवार के करीबी माने जाते हैं और कंपनी के माध्यम से कई संपत्तियों का लेन-देन हुआ। ईडी के मुताबिक इन संपत्तियों को बाद में लालू परिवार से जुड़े लोगों के नियंत्रण में लाया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा कि उसके पास ऐसे दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं जिनसे यह साबित होता है कि नौकरी के बदले जमीन लेने की प्रक्रिया के पीछे एक संगठित साजिश थी। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय किए जाएं ताकि मामले की आगे की सुनवाई शुरू हो सके।
दूसरी ओर, आरोपियों की ओर से इन आरोपों का पहले भी खंडन किया जाता रहा है। बचाव पक्ष का कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसमें लगाए गए आरोप निराधार हैं। हालांकि इस मामले में अंतिम फैसला अदालत के निर्णय पर ही निर्भर करेगा।
फिलहाल राउज एवेन्यू कोर्ट इस मामले में आरोप तय करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुन रही है। यदि अदालत को ईडी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त लगते हैं तो आरोप तय किए जा सकते हैं, जिसके बाद इस बहुचर्चित मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।