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BIHAR ELECTION : लालू यादव की चादरपोशी से गरमाई बिहार की सियासत, जदयू-भाजपा ने लगाया यह आरोप

BIHAR ELECTION : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना स्थित हाईकोर्ट दरगाह पर पहुंचकर चादरपोशी की। दरगाह के उर्स मुबारक के मौके पर लालू यादव

12-Sep-2025 04:08 PM

By First Bihar

BIHAR ELECTION : बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हर पार्टी और नेता जनता को साधने के लिए अपने-अपने तरीके आजमा रहे हैं। इसी बीच शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना स्थित हाईकोर्ट दरगाह पर पहुंचकर चादरपोशी की। दरगाह के उर्स मुबारक के मौके पर लालू यादव अपने परिवार और करीबी नेताओं के साथ पहुंचे। उन्होंने चादर चढ़ाई और राज्य की शांति, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआएं मांगी।


लालू प्रसाद यादव की यह गतिविधि चुनावी मौसम में बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है। दरगाह पर चादरपोशी की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का दौर शुरू हो गया। राजद प्रमुख ने खुद भी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “उर्स मुबारक के मौके पर पटना हाईकोर्ट दरगाह में चादरपोशी कर प्रदेश में लोगों के बीच मेल-जोल, प्रेम, शांति, तरक्की और सद्भाव के लिए दुआ मांगी।”


हालांकि, लालू यादव का यह कदम विपक्षी दलों को रास नहीं आया। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर सीधा हमला बोलते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया।


जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि चादरपोशी करने का हक सबको है, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन लालू प्रसाद यादव किस मन्नत के लिए गए थे, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लालू यादव ऊपर से तो समाज और आम जनता की बात करते हैं लेकिन अंदरखाने उनकी मन्नत है कि बेटा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाए। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि जो कभी पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों का विरोध करते थे, आज वही लालू यादव बदलते हालात में दरगाह और मंदिरों में नजर आ रहे हैं।


उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में लालू प्रसाद यादव गया जाकर पिंडदान भी कर आए थे। लेकिन इन सब से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा मिलने वाला नहीं है। जदयू प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि लालू यादव अपने गांव में कब्रिस्तान की घेराबंदी तक नहीं करा पाए थे, जबकि यह काम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने पूरा किया।


भाजपा ने भी लालू प्रसाद यादव पर हमला करते हुए कहा कि उनका हर कदम सिर्फ चुनावी नफे-नुकसान के हिसाब से होता है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लोगों की धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए करना चाहते हैं। भाजपा का कहना है कि लालू यादव का यह कदम साफ तौर पर तुष्टिकरण की राजनीति है।


वहीं, राजद समर्थकों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव ने हमेशा सभी धर्मों और समाज के बीच भाईचारे और सद्भाव की बात की है। उनके मुताबिक, दरगाह पर जाकर दुआ करना किसी राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ कदम है।


चुनावी मौसम में लालू यादव की हर गतिविधि राजनीतिक नजरिये से देखी जा रही है। चादरपोशी के इस कदम को जहां उनके समर्थक सकारात्मक बताते हैं, वहीं विपक्षी दल इसे चुनावी नाटक और तुष्टिकरण की राजनीति करार दे रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार की राजनीति में धर्म, परंपरा और आस्था भी इस बार चुनावी मुद्दों में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।