Lallu Mukhiya : पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल न्यायालय परिसर में बुधवार को उस समय हलचल बढ़ गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया एक पुराने आपराधिक मामले में पेशी के लिए अदालत पहुंचे। उनकी पेशी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समर्थक कोर्ट परिसर और उसके आसपास जुट गए, जिससे पूरे इलाके में काफी देर तक चहल-पहल का माहौल बना रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।


अदालत पहुंचने के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने लल्लू मुखिया से बातचीत करने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने मामले पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुरूप वह पेशी के लिए आए हैं और उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष सुनवाई होगी।


जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023 में हुई एक चर्चित हत्या की घटना से जुड़ा हुआ है। 10 फरवरी 2023 को दुल्लापुर गांव निवासी कमलेश प्रसाद की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में काफी तनाव का माहौल बन गया था। मृतक के परिजनों ने हत्या के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।


इस मामले में मृतक के पुत्र कुमार गौरव की ओर से बाढ़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दर्ज कांड संख्या 98/23 में कई बिंदुओं की जांच की गई और पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की थी। जांच के क्रम में कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उन्हें इस केस में अप्राथमिकी अभियुक्त के रूप में शामिल किया गया। तभी से यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


बुधवार को हुई पेशी के दौरान अदालत परिसर में मौजूद उनके समर्थकों ने अपने नेता के पक्ष में खुलकर बयान दिए। समर्थक सत्येंद्र सिंह ने कहा कि लल्लू मुखिया को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण इस मामले में फंसाया गया है। उनका दावा था कि निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी और न्यायालय से उन्हें राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि परिवार और समर्थकों को न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।


वहीं, एक अन्य समर्थक मिक्की भगत ने भी अदालत से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि कानून और न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखना सभी नागरिकों का कर्तव्य है और उन्हें भरोसा है कि अदालत तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय देगी।


कोर्ट परिसर में समर्थकों की भारी मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सक्रिय रहा। पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की थी। पूरे समय अदालत परिसर में सुरक्षा कर्मी मुस्तैद दिखाई दिए ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।


फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और इसकी सुनवाई जारी है। अदालत द्वारा आगे जो भी निर्देश जारी किए जाएंगे, उसी के अनुसार अगली कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस बहुचर्चित मामले पर राजनीतिक हलकों और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।