Bihar News : पटना की सड़कों पर गुरुवार को जो तस्वीर सामने आई, उसने बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी। एक तरफ जेडीयू के विधायक अनंत कुमार सिंह, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार और बीच में अनंत सिंह के प्रत्याशी। अनंत सिंह जब अपने कैंडिडेट के नामांकन जुलूस में खुले तौर पर पीला गमछा लहराते नजर आए तो सवाल उठना स्वाभाविक था—क्या अब यह सिर्फ अनंत और नीरज की लड़ाई है या फिर जेडीयू के लिए भी यह बड़ी चुनौती बन चुकी है?
अनंत सिंह ने पटना स्नातक एमएलसी चुनाव में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रखा है। वह जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में खड़े हैं और उनके चुनाव प्रचार में उतरने की बात भी कह चुके हैं। एक अक्टूबर को अनुज सिंह के नामांकन के दौरान अनंत सिंह की मौजूदगी और समर्थकों की भीड़ ने इस टकराव को और ज्यादा सार्वजनिक कर दिया।अब कहानी में नया मोड़ यह है कि इस विवाद को शांत कराने की जिम्मेदारी जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मुंगेर सांसद ललन सिंह के कंधों पर आती दिख रही है। सवाल यही है—क्या ललन बाबू उस विवाद को खत्म कर पाएंगे, जिससे वह खुद पहले दूरी बनाते नजर आए थे?
दरअसल, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की खींचतान कोई आज की कहानी नहीं है। पटना स्नातक सीट के चुनाव ने पुराने विवाद को फिर से सामने ला दिया है। नीरज कुमार इस सीट से लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में हैं, जबकि अनंत सिंह ने उनके खिलाफ खुलकर अभियान चलाने की बात कही है।अनंत सिंह का कहना रहा है कि उनका विरोध जेडीयू से नहीं, बल्कि नीरज कुमार से व्यक्तिगत है। वह नीरज कुमार पर अपने खिलाफ राजनीतिक विरोध करने के आरोप लगाते रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने पुराने आपराधिक मामले को लेकर भी नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नीरज कुमार की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर राजनीतिक जवाब सामने आए हैं।
अब जरा ललन सिंह वाले अध्याय को समझिए। इससे पहले जब इस विवाद को लेकर ललन सिंह से सवाल किया गया था तो उन्होंने इसे अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का मामला बताया था और खुद को इससे अलग रखा था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है। सितंबर में भी ललन सिंह ने जेडीयू में गुटबाजी की चर्चाओं को खारिज किया था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अनंत सिंह सिर्फ बयान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह नीरज कुमार के खिलाफ मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। जन सुराज के अनुज सिंह के नामांकन में उनकी खुली मौजूदगी ने जेडीयू के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल निकलता है—अगर अनंत सिंह इसे पार्टी का नहीं बल्कि निजी विवाद बताते हैं, तो क्या ललन सिंह दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत दूरी खत्म करा पाएंगे?
सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद को सुलझाने की कोशिश के तहत ललन सिंह की नीरज कुमार से टेलीफोन पर बातचीत भी हुई थी। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि विवाद की शुरुआत किस तरफ से हुई और समझौते की पहल कौन करे। हालांकि, अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर कायम रहते हैं तो समझौते की राह आसान नहीं होगी। अब जेडीयू के सामने दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि अनंत सिंह ने जिस तरह से अनुज सिंह का समर्थन किया है, उसे किस रूप में देखा जाए। अनंत सिंह लगातार यह कहते रहे हैं कि पटना स्नातक का चुनाव दलगत चुनाव नहीं है और नीरज कुमार का विरोध करना जेडीयू का विरोध नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, नीरज कुमार जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ललन सिंह अनंत सिंह को मना पाएंगे या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या वह दोनों नेताओं के बीच ऐसी जमीन तैयार कर पाएंगे, जहां अनंत सिंह नीरज कुमार का विरोध रोकें और पार्टी का उम्मीदवार अपने ही विधायक के विरोध से बाहर निकल सके? और एक सवाल सबसे ज्यादा दिलचस्प है—क्या ललन बाबू इस बार सिर्फ समझाने जाएंगे या फिर उनके पास कोई ऐसा सियासी फॉर्मूला भी है, जिससे अनंत और नीरज के बीच सालों से चली आ रही तल्खी पर विराम लग सके?
बहरहाल, 23 अक्टूबर को पटना स्नातक सीट पर मतदान होना है। यानी जेडीयू के पास ज्यादा समय नहीं है।अब देखना यही होगा कि मुंगेर के सांसद ललन सिंह इस उलझी हुई सियासी गांठ को खोल पाते हैं या फिर अनंत सिंह और नीरज कुमार की यह लड़ाई चुनावी मैदान तक उसी तेवर के साथ पहुंचती है। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि पटना स्नातक सीट का चुनाव सिर्फ एक एमएलसी सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि जेडीयू के भीतर पुराने रिश्तों और नए सियासी समीकरणों की भी परीक्षा बन चुका है।