Bihar News: बिहार में डीरेगुलेशन फेज 2 के अंतर्गत लंबित सभी मामलों को अगले 15 दिनों के अन्दर निपटाकर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। व्यावसायिक कानूनों के तहत छोटी तकनीकी चूकों के लिए कारावास जैसे कठोर प्रावधानों को हटाकर अर्थदंड (पेनालिटी) में बदलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक ने शुक्रवार को मुख्य सचिवालय स्थित सभाकक्ष में राज्य में निवेश को बढ़ावा, व्यापार सुगमता में सुधार और पुराने पड़ चुके कानूनों को समाप्त करने के लिए डीरेगुलेशन फेज-1 व 2 पर विस्तृत समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की।
विशेष सचिव ने कहा कि यदि कोई सुधार एक से अधिक विभागों से संबंधित है, तो कैबिनेट सचिवालय विभाग समन्वय की भूमिका निभाए, ताकि फाइलें लंबित न रहें। सभी विभागीय नोडल अधिकारी प्रत्येक शुक्रवार को समीक्षा के लिए प्रगति रिपोर्ट कैबिनेट सचिवालय को भेजें।
केके पाठक ने निर्देश दिया कि राज्य के सभी विभाग अपने कार्यक्षेत्र से अनावश्यक शिकायत का बोझ (कम्पलायनस बर्डन) को कम करें। साथ ही फेज-2 के तहत चिन्हित सुधारों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। बुनियादी ढांचे के विकास में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सतत विकास के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता(एनबीसीएस) 2026 के नए मानकों को राज्य के बिल्डिंग बाय लाज में एकीकृत करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इस क्रम में राज्य में शहरी नियोजन को आधुनिक बनाने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो(एफएआर) के नियमों को तर्कसंगत बनाने और सरकारी संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए सम्पूर्ण सुविधा प्रबंधन(टीएफएम) मॉडल को अपनाने का निर्देश दिया गया।
विशेष सचिव ने सख्त लहजे में कहा कि अनावश्यक नियम निवेश के मार्ग में बाधा है। इसलिए विभाग ऐसे सभी नियमों, रिटर्न और रजिस्टरों की सूची तैयार करें जिन्हें समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने बिहार द्वारा अब तक की गई प्रगति पर संतोष जताया और राज्य को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने के लिए केंद्र की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्य सचिव ने सभी स्वीकृतियों के लिए 'सिंगल विंडो सिस्टम' और 'स्व-प्रमाणीकरण' को अनिवार्य रूप से लागू करने कहा ताकि मानवीय हस्तक्षेप को कम किया जा सके। सभी विभागों 'मिशन मोड' में काम करें। मौके पर वित्त, उद्योग, नगर विकास, भवन निर्माण एवं अन्य संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।