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BIHAR NEWS : ‘नौकरानी को थार, गर्लफ्रेंड्स को प्लॉट’—SDPO गौतम कुमार से EOU की मैराथन पूछताछ, हर बार सीमाई पोस्टिंग के सवाल पर छूटे पसीने

किशनगंज के पूर्व SDPO गौतम कुमार से आर्थिक अपराध इकाई ने 5 घंटे तक पूछताछ की। करोड़ों की संपत्ति, जमीन और महंगी गाड़ियों के स्रोत को लेकर कई अहम सवाल उठे हैं।

07-Apr-2026 07:33 AM

By First Bihar

BIHAR NEWS : बिहार में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के मामलों पर सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार से उनकी करोड़ों की संपत्तियों के स्रोत को लेकर गहन पूछताछ की है। सोमवार को गौतम कुमार पटना स्थित ईओयू कार्यालय में उपस्थित हुए, जहां उनसे करीब पांच घंटे तक लगातार पूछताछ की गई।


ईओयू की ओर से जारी बयान के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनका अब सत्यापन किया जाएगा। जांच टीम को संदेह है कि गौतम कुमार के पास मौजूद संपत्तियां उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक हैं। इसी वजह से उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने अपने नाम के अलावा पत्नी, परिजनों और महिला मित्रों के नाम पर ढाई दर्जन से अधिक भूखंड कैसे खरीदे और इसके लिए पैसे कहां से आए।


पूछताछ के दौरान ईओयू ने किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ की पूर्णिया, पटना के अलावा दिल्ली एनसीआर, पश्चिम बंगाल और नेपाल में मिली संपत्तियों को लेकर उनसे पूछताछ की। इन भूखंडों की खरीद कब हुई और उसके लिए पैसे की व्यवस्था किस तरह की? थार और क्रेटा जैसी तीन महंगी गाड़ियां, लाखों रुपये के स्वर्णाभूषण और कीमती घड़ियों की खरीद के स्रोत को लेकर भी पूछताछ हुई। हालांकि, एसडीपीओ कई सवालों के सतही जवाब दिये तो कई सवाल टाल गए। उन्होंने बार-बार अपनी खराब तबीयत का भी हवाला दिया। मंगलवार को आर्थिक अपराध इकाई कार्यालय में सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को पेशी होगी। इकाई ने 31 मार्च को छापेमारी के दौरान ही उनको पूछताछ के लिए मंगलवार को ईओयू कार्यालय में हाजिर होने की नोटिस दी थी।


एसडीपीओ के माफियाओं से संबंधों को लेकर भी पूछताछ हुई। उनसे जानने का प्रयास किया गया कि लगभग 34 वर्षों के सेवाकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग सीमाई जिलों में ही कैसे रही? क्या इसके लिए उन्होंने सफेदपोशों का सहारा लिया। उनकी काली कमाई का निवेश किन-किन जगहों पर है और उनमें किनकी सहभागिता है। ईओयू के मुताबिक एसडीपीओ के बयानों का पुन: सत्यापन कराते हुए उनको दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।


जांच एजेंसी ने गौतम कुमार की संपत्तियों का दायरा भी खंगाला है। पूछताछ के दौरान उनसे पूर्णिया, पटना, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि नेपाल में मौजूद जमीनों और संपत्तियों के बारे में सवाल किए गए। ईओयू ने यह जानने की कोशिश की कि इन भूखंडों की खरीद कब की गई और इसके लिए फंडिंग का स्रोत क्या था। सिर्फ अचल संपत्ति ही नहीं, बल्कि चल संपत्तियों को लेकर भी ईओयू ने कड़े सवाल पूछे। जांच के दौरान थार और क्रेटा जैसी महंगी गाड़ियों की खरीद, लाखों रुपये के स्वर्णाभूषण और कीमती घड़ियों के स्रोत को लेकर भी गौतम कुमार से जवाब मांगा गया। अधिकारियों ने यह स्पष्ट करने को कहा कि इन सभी संपत्तियों के लिए उन्होंने धन की व्यवस्था किस प्रकार की।


सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान गौतम कुमार कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कुछ प्रश्नों के सतही उत्तर दिए, जबकि कई सवालों को टालने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने अपनी खराब तबीयत का हवाला भी दिया, जिससे पूछताछ के दौरान कई बार रुकावट आई। ईओयू ने यह भी बताया कि गौतम कुमार के जवाबों का अब क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। जांच में जुटी टीम उनके बयानों की सच्चाई की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। इसके लिए उन्हें जल्द ही नया नोटिस जारी किया जाएगा।


इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू यह है कि ईओयू ने गौतम कुमार के माफियाओं से संभावित संबंधों को लेकर भी पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि उनके 34 वर्षों के लंबे सेवाकाल के दौरान उनकी अधिकतर पोस्टिंग सीमावर्ती जिलों में ही क्यों रही। क्या इसके पीछे किसी प्रभावशाली या सफेदपोश व्यक्तियों का हाथ था, यह भी जांच के दायरे में है।


इसके अलावा, ईओयू यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गौतम कुमार की कथित काली कमाई का निवेश किन-किन क्षेत्रों में किया गया और उसमें किन लोगों की भागीदारी रही। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में काम कर रही है।


इधर, इस मामले से जुड़ी कार्रवाई यहीं नहीं रुकने वाली है। आर्थिक अपराध इकाई ने सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार को भी पूछताछ के लिए तलब किया है। उन्हें 31 मार्च को हुई छापेमारी के दौरान ही नोटिस जारी कर मंगलवार को ईओयू कार्यालय में पेश होने को कहा गया था।


कुल मिलाकर, यह मामला बिहार में सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और उनके आय स्रोतों को लेकर चल रही सख्त जांच का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि ईओयू इस मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की गहन जांच कर रही है।