Khan Sir : चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके सहयोगियों की अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) याचिका पर आज अदालत में सुनवाई होनी है। इस मामले में कोर्ट के समक्ष जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा हथियारों से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर अदालत बेल याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। इसी मामले में खान सर के दोनों बॉडीगार्ड्स की जमानत याचिका पर भी सुनवाई निर्धारित है। पिछली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच हथियारों की वैधता को लेकर तीखी बहस हुई थी।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
30 जून को हुई सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने अदालत को बताया था कि दोनों बॉडीगार्ड्स के पास मौजूद हथियारों का इस्तेमाल दहशत फैलाने के उद्देश्य से किया गया और फायरिंग की गई। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद मौआर ने अदालत में दावा किया था कि संबंधित हथियार लाइसेंसी हैं और उनके सभी आवश्यक दस्तावेज पुलिस पहले ही जब्त कर चुकी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जांच अधिकारी और लोक अभियोजक को हथियारों से संबंधित मूल दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया था। इन्हीं दस्तावेजों को आज कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद जमानत पर फैसला आने की संभावना है।
पुलिस जांच में सामने आए अहम तथ्य
पटना पुलिस की जांच के दौरान खान सर के दोनों बॉडीगार्ड्स के हथियारों के सत्यापन में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस हथियार से कथित तौर पर फायरिंग की गई थी, वह उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी तालेबर सिंह के नाम पर लाइसेंसी है।
हालांकि जांच में यह बात सामने आई कि उसके हथियार का लाइसेंस पूरे भारत में मान्य नहीं था। पुलिस का आरोप है कि तालेबर सिंह बिहार में हथियार लेकर सुरक्षा ड्यूटी कर रहा था, जबकि उसके पास राज्य में हथियार के साथ ड्यूटी करने की आवश्यक वैध अनुमति उपलब्ध नहीं थी। इन्हीं तथ्यों को पुलिस ने अपनी अपडेटेड केस डायरी में शामिल किया है, जिसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन को नहीं दी गई थी सूचना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तालेबर सिंह ने बिहार में हथियार लेकर नौकरी करने की जानकारी स्थानीय थाना, आर्म्स मजिस्ट्रेट या प्रशासन को नहीं दी थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि नियमानुसार दूसरे राज्य से हथियार लेकर सुरक्षा ड्यूटी करने की स्थिति में संबंधित प्रशासन को सूचना देना और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है। इसी आधार पर पुलिस मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ा रही है।
खान सर पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान पुलिस ने यह भी उल्लेख किया है कि खान सर ने अपने बॉडीगार्ड के हथियारों का स्थानीय स्तर पर पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया था। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति के दौरान संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए था। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय अदालत के आदेश और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा।
दूसरे बॉडीगार्ड के लाइसेंस की भी जांच
मामले में दूसरे बॉडीगार्ड प्रदीप कुमार के हथियार की भी जांच की गई। पुलिस के अनुसार यह हथियार उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से जारी लाइसेंस पर आधारित है। जांच में सामने आया कि लाइसेंस पर पूरे भारत में हथियार रखने की अनुमति तो है, लेकिन यह लाइसेंस प्रदीप कुमार को उनके पिता की हत्या के बाद आत्मरक्षा के उद्देश्य से जारी किया गया था। पुलिस का दावा है कि इस लाइसेंस का उपयोग निजी सुरक्षा ड्यूटी के लिए किया गया, जिसकी वैधता की भी जांच की जा रही है। इन तथ्यों को भी केस डायरी में शामिल किया गया है।
4 जून को हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद 4 जून को पटना पुलिस ने खान सर के दोनों बॉडीगार्ड्स प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से मामले की जांच लगातार जारी है।अब सभी की नजरें आज होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अग्रिम जमानत और नियमित जमानत पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।