Khagaria Fake IAS News: बिहार के खगड़िया से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। दावा है कि यहां पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो खुद को IAS अधिकारी बताता था। उसके ठिकाने से Tesla समेत लग्जरी गाड़ियां, विदेशी शराब, एटीएम कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई संदिग्ध वस्तुएं बरामद होने की बात सामने आई है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की है, वह है Tesla और दूसरी गाड़ी पर लिखा ‘भारत सरकार’। अब सवाल यह है कि अगर यह दावा सही है तो आखिर यह ‘भारत सरकार’ इन गाड़ियों तक कैसे पहुंची?
मामला गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार का बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, जिला अपराध इकाई (DIU) और गोगरी पुलिस की संयुक्त टीम ने शनिवार को मनीष कुमार गुप्ता उर्फ चिक्कू के ठिकाने पर करीब साढ़े सात घंटे तक छापेमारी की। कार्रवाई दोपहर करीब 1 बजे शुरू हुई और रात 8:30 बजे तक चली। इतनी लंबी छापेमारी के बाद पुलिस के हाथ जो सामान लगा, उसने पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया।
IAS का दावा, Tesla का ठाठ और पुलिस की पूछताछ… कहानी में ट्विस्ट पर ट्विस्ट
पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान मनीष कुमार गुप्ता लगातार खुद को IAS अधिकारी बताता रहा। इतना ही नहीं, उसने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल समेत कई बड़े अधिकारियों से करीबी संबंध होने का भी दावा किया। अब यहां पहला बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर कोई व्यक्ति खुद को IAS अधिकारी बताता है तो उसकी पहचान की जांच आखिर कितनी मुश्किल है?
IAS अधिकारियों की नियुक्ति, कैडर और पद की जानकारी सार्वजनिक होती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक खुद को IAS बताकर घूमता रहा, सरकारी पहचान का इस्तेमाल करता रहा और कथित तौर पर आलीशान जिंदगी जीता रहा, तो क्या किसी स्तर पर इसकी भनक नहीं लगी? या फिर सवाल यह होना चाहिए कि भनक लगी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
Tesla देखकर पुलिस भी चौंकी होगी, लेकिन नंबर प्लेट ने ज्यादा सवाल खड़े कर दिए
छापेमारी के दौरान दो लग्जरी वाहन जब्त किए जाने की बात सामने आई है। इनमें Tesla Model Y और दूसरी SUV शामिल बताई जा रही है। खास बात यह है कि दोनों वाहनों पर ‘भारत सरकार’ लिखा होने का दावा किया गया है।अब जरा सोचिए…एक तरफ निजी लग्जरी कार और दूसरी तरफ उस पर ‘भारत सरकार’। तो सवाल सीधा है—क्या ये सरकारी वाहन थे? अगर थे तो किस विभाग के? अगर नहीं थे तो निजी वाहन पर ‘भारत सरकार’ लिखने की इजाजत किसने दी? और अगर यह सरकारी पहचान का कथित दुरुपयोग था तो इसके पीछे मकसद क्या था?क्या सिर्फ रौब दिखाने के लिए?या फिर सरकारी अधिकारी होने का भ्रम पैदा करने के लिए?जांच एजेंसियों के लिए यही सवाल अब सबसे अहम हो सकते हैं।
Tesla में बैठकर थाने पहुंचा आरोपी… VIP अंदाज या सिर्फ संयोग?
मामले की एक और तस्वीर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि पकड़े जाने के बाद आरोपी Tesla कार में बैठकर थाने पहुंचा। अब सोशल मीडिया पर लोग इसे देखकर तरह-तरह के सवाल पूछ सकते हैं—थाने पहुंचने का अंदाज इतना VIP कैसे हो गया?लेकिन असली सवाल कार से ज्यादा उस पहचान का है, जिसके नाम पर कथित तौर पर इतनी शानो-शौकत दिखाई जा रही थी।अगर व्यक्ति वास्तव में IAS नहीं था तो फिर उसने खुद को IAS क्यों बताया?क्या किसी सरकारी अधिकारी की पहचान या पद का इस्तेमाल किया गया?क्या इससे किसी व्यक्ति, संस्था या सरकारी विभाग पर प्रभाव डालने की कोशिश की गई?इन सभी सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे।
घर से विदेशी शराब… एक बोतल की कीमत लाखों में?
छापेमारी में विदेशी शराब की बोतलें मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ बोतलों की कीमत एक लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। अब यहां भी सवाल कम नहीं हैं।बिहार में शराबबंदी लागू है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति के घर से महंगी विदेशी शराब बरामद होने की बात सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह शराब वहां पहुंची कैसे?कहां से आई?किसके जरिए आई?किसके लिए लाई गई?और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है?जांच अगर सिर्फ शराब की बोतलों तक सीमित रही तो शायद कहानी का बड़ा हिस्सा अधूरा रह जाए।
बारहसिंगा का सींग और चादर में लिपटी मूर्ति… घर में आखिर चल क्या रहा था?
पुलिस की तलाशी में लैपटॉप, कंप्यूटर, कई ATM कार्ड, विदेशी शराब के अलावा बारहसिंगा का सींग और चादर में लिपटी एक मूर्ति मिलने की बात भी कही जा रही है। अब इन सामानों का आपस में कोई संबंध है या नहीं, यह जांच का विषय है।लेकिन सवाल जरूर बनता है—एक कथित IAS अधिकारी के ठिकाने पर आखिर इतना अलग-अलग तरह का सामान क्यों था?क्या इनमें से कुछ वस्तुएं वैध हैं?क्या किसी वस्तु को लेकर अलग कानून लागू होता है?क्या बरामद सामान का इस्तेमाल किसी तरह की गतिविधि में किया जाता था? पुलिस को इन सभी पहलुओं की जांच करनी होगी।
100 करोड़ की संपत्ति का दावा… इतनी दौलत आई कहां से?
मामले को सबसे गंभीर बनाने वाला दावा है कि आरोपी के पास कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। अगर जांच में यह दावा सही साबित होता है तो फिर सवाल Tesla से कहीं बड़ा हो जाता है। एक व्यक्ति की इतनी बड़ी संपत्ति का स्रोत क्या है?आय का जरिया क्या था?कौन-कौन सी जमीन, मकान, कंपनी या निवेश उसके नाम हैं?क्या संपत्ति उसके अपने नाम है या किसी और के नाम पर?क्या आय और संपत्ति में कोई असमानता है?और सबसे महत्वपूर्ण—अगर वह वास्तव में IAS अधिकारी नहीं था तो फिर उसने इतनी संपत्ति कैसे बनाई? इन सवालों के जवाब आर्थिक जांच एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कनाडा में भाई… विदेश कनेक्शन भी जांच के घेरे में?
बताया जा रहा है कि आरोपी का एक भाई कनाडा में रहता है। सिर्फ विदेश में रहने वाला भाई होना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। लेकिन अगर जांच में वित्तीय लेनदेन, संपत्ति या किसी अन्य गतिविधि का विदेशी कनेक्शन सामने आता है, तो यह पहलू भी जांच का हिस्सा बन सकता है। फिलहाल किसी भी विदेशी कनेक्शन को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
सबसे बड़ा सवाल—‘फर्जी IAS’ बना कैसे?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है।अगर मनीष कुमार गुप्ता वास्तव में IAS अधिकारी नहीं था, तो उसने खुद को IAS बताकर किस-किस को प्रभावित किया?कितने समय से वह यह पहचान इस्तेमाल कर रहा था?क्या उसने कभी किसी सरकारी कार्यालय में अपने कथित पद का इस्तेमाल किया?क्या किसी अधिकारी या संस्था पर प्रभाव डालने की कोशिश की?क्या सरकारी वाहन या पहचान से जुड़ी कोई फर्जी व्यवस्था तैयार की गई?और क्या इस पूरे मामले में उसके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल है?फिलहाल पुलिस ने विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
Tesla की कीमत करोड़ों में नहीं, लेकिन कहानी जरूर करोड़ों वाली!
Tesla Model Y के भारत में उपलब्ध वेरिएंट की कीमत करीब 60 लाख रुपये से शुरू होती है और लॉन्ग रेंज मॉडल की कीमत करीब 68 लाख रुपये तक बताई जाती है। इसकी रेंज भी वेरिएंट के अनुसार करीब 500 से 622 किलोमीटर तक बताई जाती है।लेकिन यहां असली सवाल Tesla की कीमत का नहीं है।सवाल यह है कि कार किसकी थी, उसके कागजात क्या कहते हैं और उस पर ‘भारत सरकार’ क्यों लिखा था?क्योंकि गाड़ी महंगी होना अपराध नहीं है।सरकारी पहचान का कथित गलत इस्तेमाल, अगर जांच में साबित होता है, तो मामला जरूर गंभीर हो सकता है। फिलहाल खगड़िया की यह कहानी कई सवाल छोड़ गई है—IAS कौन था? ‘भारत सरकार’ किसकी थी? 100 करोड़ की संपत्ति का राज क्या है? और सबसे बड़ा सवाल… अगर इतने बड़े दावे किए जा रहे थे तो इतने दिनों तक किसी को शक क्यों नहीं हुआ? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि यह मामला सिर्फ एक Tesla और एक कथित फर्जी IAS तक सीमित नजर नहीं आ रहा। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कहानी के कई और पन्ने खुल सकते हैं।