कटिहार: जिस उम्र में किसी खिलाड़ी के सपने आकार लेना शुरू करते हैं, जिस उम्र में जीते हुए एक-एक मेडल को भविष्य की बड़ी कामयाबी की सीढ़ी माना जाता है, उसी उम्र में कटिहार के एक होनहार ताइक्वांडो खिलाड़ी की जिंदगी अचानक थम गई। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन करने वाले 13 वर्षीय गोपाल कृष्ण की छत्तीसगढ़ में नदी में डूबने से मौत हो गई। हादसे ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि कटिहार के खेल जगत को भी गहरा झटका दिया है।
गोपाल कृष्ण ताइक्वांडो के उभरते हुए खिलाड़ी थे। उन्होंने हाल ही में इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। महज 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और पूरे कटिहार के लिए गर्व की बात थी। उनकी प्रतिभा को देखकर खेल प्रेमियों को उम्मीद थी कि आने वाले वर्षों में यह खिलाड़ी राज्य और देश के लिए कई और पदक जीत सकता है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
दरअसल, दशहरा की छुट्टियों के दौरान गोपाल कृष्ण अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ गए हुए थे। बताया जा रहा है कि परिवार के कुछ सदस्य सूरजपुर में रहते हैं। छुट्टी के इसी दौरान गोपाल कृष्ण अपने भाई कृष्ण गोपाल और रिश्तेदार विवेक सिंह तथा उनके बेटे अभिजीत सिंह के साथ रेन नदी में स्नान करने गए थे। नदी में नहाने के दौरान अचानक चारों गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते हादसा हो गया।
इस दर्दनाक हादसे में चारों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे शामिल हैं। हादसे की खबर जैसे ही परिवार और रिश्तेदारों तक पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। जिस परिवार में त्योहार की छुट्टियों को लेकर खुशी का माहौल था, वहां अचानक मातम पसर गया।लेकिन इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर गोपाल कृष्ण से जुड़ी उनकी खेल यात्रा है। कुछ समय पहले तक जिस किशोर के हाथ में ताइक्वांडो का गोल्ड मेडल था, उसी खिलाड़ी की असमय मौत की खबर अब उनके परिवार और परिचितों को भीतर तक झकझोर रही है।
गोपाल कृष्ण ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। इंदौर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके खेल करियर को लेकर काफी उम्मीदें थीं। कम उम्र में जिस तरह उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदर्शन किया, उससे साफ था कि उनमें आगे बढ़ने की क्षमता थी। परिवार और उनके साथ जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि वह आने वाले दिनों में ताइक्वांडो के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे। एक खिलाड़ी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। गोपाल कृष्ण ने यह उपलब्धि उस उम्र में हासिल कर ली थी, जब ज्यादातर बच्चे अभी खेल की बारीकियां सीख रहे होते हैं। उनका यह स्वर्ण पदक अब परिवार के लिए गर्व के साथ-साथ एक ऐसी याद बन गया है, जिसे याद करते हुए आंखें नम हो जाएंगी।
परिजनों के मुताबिक हादसे में जान गंवाने वालों में हाजीपुर निवासी विवेक सिंह, उनके पुत्र अभिजीत सिंह और कटिहार निवासी सागर सिंह उर्फ सेट्ठी सिंह के दोनों बेटे गोपाल कृष्ण और कृष्ण गोपाल शामिल हैं। सागर सिंह के भाई नागेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चारों के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बनारस ले जाया जा रहा है। परिवार इस समय गहरे सदमे में है और किसी को भी इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है।
गोपाल कृष्ण की मौत की खबर कटिहार पहुंचते ही खेल जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई। जिस खिलाड़ी की पहचान कभी उसके गोल्ड मेडल से होती थी, आज वही मेडल उसके अधूरे सपनों की कहानी बन गया है। परिवार ने एक बेटा खोया है, लेकिन कटिहार ने भी एक ऐसे युवा खिलाड़ी को खो दिया है, जिसके पास आगे देश के लिए पदक जीतने का सपना और उसे पूरा करने का हुनर दोनों मौजूद थे।
गोपाल कृष्ण अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका जीता हुआ राष्ट्रीय स्वर्ण पदक उनकी प्रतिभा की गवाही देता रहेगा। जिस उम्र में उन्हें और कई मेडल जीतने थे, उसी उम्र में उनकी जिंदगी का सफर खत्म हो गया। कटिहार के इस गोल्ड मेडलिस्ट की कहानी अब उपलब्धि और दर्द, दोनों की कहानी बन गई है।