BIHAR NEWS : बिहार के कटिहार से पुलिस महकमे की सुरक्षा व्यवस्था को हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने पुलिस को ही चकमा देकर पुलिस लाइन जैसे संवेदनशील और सुरक्षित परिसर में करीब 15 से 20 दिनों तक फर्जी सिपाही बनकर समय बिताया। हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों तक वह पुलिसकर्मियों के बीच रहा, लेकिन किसी को उसकी असलियत की भनक तक नहीं लगी। आखिरकार मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सहायक थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फर्जी सिपाही को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान दीपक कुमार के रूप में हुई है।

इस घटना ने पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था और जवानों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस परिसर को आमतौर पर पुलिस विभाग का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, वहां कोई बाहरी व्यक्ति इतने दिनों तक पुलिसकर्मी बनकर कैसे रह सकता है? यही सवाल अब इस पूरे मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

पुलिस लाइन में जवान बनकर काट रहा था दिन

मिली जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार पिछले करीब 15 से 20 दिनों से कटिहार पुलिस लाइन में फर्जी सिपाही की पहचान के साथ रह रहा था। उसने खुद को पुलिस विभाग का जवान बताकर वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखी थी। इस दौरान वह किस तरह पुलिस लाइन में रह रहा था और वहां के लोगों के बीच उसने अपनी पहचान कैसे बनाई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि दीपक की गतिविधियों को लेकर मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसके बाद सहायक थाना पुलिस ने उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने फर्जी सिपाही बनने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया था।

सबसे सुरक्षित परिसर में कैसे मिली जगह?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस लाइन में प्रवेश और वहां रहने के लिए सामान्य तौर पर पहचान और विभागीय जानकारी का सत्यापन जरूरी होता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि दीपक ने पुलिस लाइन में अपनी जगह कैसे बनाई?

क्या उसने किसी फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था? क्या उसने खुद को किसी दूसरे पुलिसकर्मी का परिचित बताकर वहां प्रवेश पाया था? या फिर इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।

पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि दीपक अकेले इस काम को अंजाम दे रहा था या उसके पीछे कोई और व्यक्ति भी शामिल है। उसके पुलिस लाइन में आने-जाने, रहने और वहां के लोगों से संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

आखिर क्या थी फर्जी सिपाही बनने की वजह?

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीपक कुमार आखिर पुलिस लाइन में फर्जी सिपाही बनकर क्यों रह रहा था? क्या उसका मकसद केवल वहां ठहरना था या इसके पीछे कोई बड़ी योजना थी? क्या वह किसी खास व्यक्ति तक पहुंच बनाना चाहता था या पुलिस विभाग से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रख रहा था? इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक उसके मकसद को लेकर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए पूछताछ और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

पुलिस की पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज

दीपक कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके मोबाइल फोन, पहचान से जुड़े दस्तावेजों और संपर्कों की जांच कर सकती है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने पिछले 15 से 20 दिनों के दौरान किन-किन लोगों से मुलाकात की और पुलिस लाइन में किन गतिविधियों में शामिल रहा।

इस मामले में पुलिस की जांच का दायरा केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह भी पता लगाना जरूरी है कि आखिर एक संदिग्ध व्यक्ति इतने दिनों तक पुलिस लाइन में कैसे रह पाया और इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।

कटिहार की इस घटना ने पुलिस विभाग के भीतर पहचान सत्यापन और सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर पुलिस की जांच पर टिकी है। पूछताछ में दीपक ने क्या खुलासे किए हैं, वह पुलिस लाइन में किसके संपर्क से पहुंचा और उसका असली मकसद क्या था, इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।