Bihar News : बिहार की पुलिस सेवा में अपने तेजतर्रार अंदाज और सख्त फैसलों से पहचान बनाने वाली पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कभी अपराधियों के खिलाफ अपने एक्शन को लेकर चर्चा में रहने वालीं 'लेडी सिंघम' अब एक अलग वजह से खबरों में हैं। इस बार मामला किसी अपराध या पुलिसिया कार्रवाई का नहीं, बल्कि बिहार की सियासत से जुड़ा है। आईपीएस की नौकरी छोड़ चुकीं काम्या मिश्रा ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात की है। पटना में हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सवाल उठने लगा है कि क्या काम्या मिश्रा अब वर्दी के बाद राजनीति की पारी शुरू करने जा रही हैं? क्या बिहार की राजनीति में कोई नया चेहरा दस्तक देने वाला है?


दरअसल, काम्या मिश्रा शुक्रवार को पटना स्थित संजय झा के सरकारी आवास पहुंचीं। यहां दोनों के बीच मुलाकात हुई। इस मुलाकात की तस्वीरें संजय झा और काम्या मिश्रा ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं। संजय झा ने इसे दीपावली की शुभकामनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ी शिष्टाचार मुलाकात बताया। वहीं, काम्या मिश्रा ने भी तस्वीर साझा करते हुए संजय झा को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बिहार को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एक मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में संजय झा के प्रयासों को प्रेरणादायी बताया।


हालांकि, यह मुलाकात भले ही शिष्टाचार भेंट बताई जा रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि काम्या मिश्रा पहले ही राजनीति में आने को लेकर अपनी इच्छा और विचार जाहिर कर चुकी हैं। ऐसे में जेडीयू के शीर्ष नेता से उनकी मुलाकात ने अटकलों को और हवा दे दी है। फिलहाल काम्या मिश्रा ने जेडीयू में शामिल होने या चुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए इसे अभी राजनीतिक संभावनाओं और चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।


काम्या मिश्रा की पहचान बिहार में किसी परिचय की मोहताज नहीं रही है। भारतीय पुलिस सेवा के 2019 बैच की अधिकारी रहीं काम्या ने बेहद कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली थी। यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने देशभर में 172वीं रैंक हासिल की थी। शुरुआत में उन्हें हिमाचल प्रदेश कैडर मिला था, लेकिन बाद में वह अपने पति के बिहार कैडर में होने के कारण बिहार आ गई थीं। यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वैशाली जिले के लालगंज में थाना प्रभारी के रूप में भी उन्होंने काम किया। अपने सख्त तेवर और अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के अंदाज के कारण वह लगातार चर्चा में रहीं।


काम्या मिश्रा को सबसे ज्यादा पहचान दरभंगा में ग्रामीण एसपी रहते हुए मिली। अगस्त 2024 में पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी के पिता जीतनराम सहनी की हत्या ने पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया था। इस चर्चित हत्याकांड की जांच में काम्या मिश्रा की भूमिका काफी अहम रही। मामले का जल्द खुलासा करने और आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस की कार्रवाई की खूब चर्चा हुई। इसके बाद उनकी छवि एक सख्त और तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के रूप में और मजबूत हो गई। यही वजह रही कि लोग उन्हें 'लेडी सिंघम' कहकर बुलाने लगे।


लेकिन पुलिस सेवा में रहते हुए पहचान और लोकप्रियता हासिल करने वाली काम्या मिश्रा ने अचानक ऐसा फैसला लिया, जिसने हर किसी को चौंका दिया। उन्होंने अगस्त 2024 में दरभंगा ग्रामीण एसपी के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह लंबी छुट्टी पर चली गईं। बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और आईपीएस की नौकरी से उनका नाता समाप्त हो गया। कम उम्र में प्रतिष्ठित सरकारी सेवा छोड़ने का उनका फैसला काफी चर्चा में रहा था। उस समय भी लोगों के मन में सवाल था कि आखिर वह आगे क्या करने वाली हैं?


नौकरी छोड़ने के बाद काम्या मिश्रा ने अपने परिवार के कारोबार की जिम्मेदारी संभाल ली। वह फिलहाल जीएम आयरन एंड स्टील कंपनी की डायरेक्टर हैं। उनके परिवार का कारोबार आयरन और स्टील से जुड़ा है। कंपनी स्टील रॉड, टीएमटी बार, एंगल और चैनल जैसे उत्पादों का निर्माण करती है। कंपनी का रजिस्टर्ड कार्यालय कोलकाता में है, जबकि इसकी फैक्ट्रियां ओडिशा के मयूरभंज और झारखंड के जमशेदपुर में स्थित हैं। यानी आईपीएस की वर्दी छोड़ने के बाद काम्या ने कॉरपोरेट और कारोबारी दुनिया में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली।


काम्या मिश्रा की निजी जिंदगी का भी बिहार से गहरा जुड़ाव है। उनकी शादी साल 2020 में अपने ही बैच के आईपीएस अधिकारी अवधेश कुमार दीक्षित से हुई थी। अवधेश दीक्षित फिलहाल भोजपुर जिले के एसपी के पद पर तैनात हैं। पति की बिहार में पोस्टिंग होने के कारण आईपीएस सेवा छोड़ने के बाद भी काम्या का राज्य से जुड़ाव बना हुआ है। हाल ही में उन्होंने आरा में अपने पति के साथ जन्मदिन भी मनाया था।


अब सवाल यह है कि क्या काम्या मिश्रा कारोबार तक ही सीमित रहेंगी या फिर सार्वजनिक जीवन में एक नई भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं? इस सवाल का जवाब उनके पुराने बयानों में भी छिपा है। एक इंटरव्यू में काम्या मिश्रा ने राजनीति को लेकर खुलकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति नीतिगत स्तर पर बदलाव लाना चाहता है तो उसके लिए राजनीति एक प्रभावी माध्यम हो सकती है। उनका मानना था कि पढ़े-लिखे और योग्य लोगों को राजनीति में आगे आना चाहिए। अगर अच्छे लोग राजनीति से दूर रहेंगे तो व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव कैसे आएगा?


काम्या मिश्रा ने यह भी कहा था कि समाज में बड़े स्तर पर बदलाव लाने के लिए राजनीतिक शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता जरूरी होती है। उनके मुताबिक, सत्ता या पावर का इस्तेमाल समाज की बेहतरी के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि उनके पुराने बयान और संजय झा से ताजा मुलाकात को जोड़कर देखा जा रहा है।


बिहार की राजनीति में पहले भी प्रशासनिक सेवा से जुड़े कई चेहरे अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। ऐसे में काम्या मिश्रा की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है। खासकर इसलिए कि वह पहले से बिहार में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी लोकप्रियता, प्रशासनिक अनुभव, युवाओं के बीच पहचान और राजनीति को लेकर उनके विचार उन्हें संभावित रूप से एक दिलचस्प चेहरा बनाते हैं।


हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि काम्या मिश्रा किसी राजनीतिक दल में शामिल होने जा रही हैं या आगामी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगी। संजय झा के साथ मुलाकात को दोनों पक्षों ने दीपावली की शुभकामनाओं से जुड़ी शिष्टाचार भेंट ही बताया है। लेकिन इतना जरूर है कि पूर्व आईपीएस की इस मुलाकात ने बिहार के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 'लेडी सिंघम' अपनी अगली पारी पुलिस सेवा और कारोबार से आगे बढ़ाकर राजनीति के मैदा

न में खेलती हैं या नहीं।