बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से जुड़े सवालों को लेकर सदन में जोरदार चर्चा हुई। जदयू विधायक श्याम रजक ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य वंचित और जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना था, लेकिन जब विद्यालयों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
श्याम रजक ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में अभी तक बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि करीब 62 प्रतिशत शिक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इन विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली कब तक पूरी होगी।
उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा है कि बीपीएससी को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अधियाचना भेज दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ अधियाचना भेजने से काम नहीं चलेगा, सरकार को यह बताना होगा कि नियुक्ति कब तक होगी और बच्चों की पढ़ाई कब सुचारू रूप से शुरू होगी।
जदयू विधायक के सवाल पर मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या 3456 है। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 96 विद्यालय स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में 91 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। मंत्री ने कहा कि उच्च माध्यमिक स्तर के कुल 46 विद्यालय संचालित हैं, जबकि चार विद्यालय निर्माणाधीन हैं। उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए कुल 1456 पद स्वीकृत हैं। वहीं अन्य स्तर के विद्यालयों के लिए 950 पद स्वीकृत किए गए हैं। इस तरह वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में कुल 2406 शिक्षक पद स्वीकृत हैं।
उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में अभी कुल 1290 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विभाग की ओर से बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति के लिए 1048 पदों की अधियाचना भेजी गई है। मंत्री ने कहा कि जैसे ही बीपीएससी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी, शिक्षकों की बहाली कर दी जाएगी।
श्याम रजक ने उठाया समय सीमा का सवाल
मंत्री के जवाब के बाद श्याम रजक दोबारा अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने सरकार से स्पष्ट समय सीमा बताने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद मान रही है कि 96 में से सिर्फ 91 विद्यालय ही संचालित हो रहे हैं तो बाकी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सिर्फ यह बताया जा रहा है कि नियुक्ति के लिए अधियाचना भेजी गई है, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि शिक्षकों की बहाली किस महीने या किस वर्ष तक पूरी होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला है, इसलिए सरकार को ठोस समय सीमा बतानी चाहिए।
CM सम्राट चौधरी ने संभाला मोर्चा, दिया बड़ा भरोसा
मामले को गंभीर देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद सदन में खड़े हुए और उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक श्याम रजक की चिंता बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने जो जानकारी दी है वह सही है, लेकिन इस दिशा में और तेजी से काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को जल्द दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग को विशेष तौर पर इस मामले में तेजी लाने के लिए कहा गया है। सीएम ने सदन में आश्वासन दिया कि एक महीने के अंदर सभी संबंधित विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति के आधार पर शिक्षकों की व्यवस्था कर दी जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षकों की कमी पर सरकार का बड़ा कदम
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद माना जा रहा है कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार जल्द अंतरिम व्यवस्था करेगी। वहीं बीपीएससी के माध्यम से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
बता दें कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में शिक्षकों की कमी का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इन विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।