JDU MLA : गोपालगंज की राजनीति इन दिनों एक बार फिर गरमा गई है। कुचायकोट से जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से जुड़े जमीन विवाद मामले में अदालत ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को जारी रखा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मई को निर्धारित की गई है, जिसे पूरे विवाद का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
पूरा मामला कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र के बेलवा इलाके में करीब 16 एकड़ जमीन को लेकर सामने आया है। आरोप है कि इस जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ और मामले में विधायक समेत कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जमीन संबंधी गतिविधियों में दबाव और धमकी का इस्तेमाल किया गया। इसी आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के बाद कोर्ट की ओर से वारंट जारी किया गया था। हालांकि, बाद में अदालत ने विधायक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अब इस राहत को फिलहाल आगे भी बरकरार रखा गया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद समर्थकों में राहत देखी जा रही है, जबकि विरोधी पक्ष लगातार कार्रवाई की मांग कर रहा है।
इस केस में सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि दोनों को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकी है। ऐसे में उनके खिलाफ गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगली सुनवाई में कोर्ट कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फैसला ले सकता है, जिससे पूरे मामले की दिशा तय होगी।
राजनीतिक रूप से देखें तो अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय गोपालगंज की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वे कुचायकोट विधानसभा सीट से लगातार छह बार विधायक रह चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में मजबूत पकड़ के कारण उनका प्रभाव सिर्फ गोपालगंज तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि आसपास के जिलों सीवान और उत्तर प्रदेश के देवरिया तक उनकी राजनीतिक पहचान बताई जाती है।
पप्पू पांडेय का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में कई दलों के साथ काम किया और निर्दलीय राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बाद में वे जनता दल यूनाइटेड के साथ जुड़े और पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी वर्षों से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
इधर, इस मामले को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। विधायक समर्थकों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और पूरा मामला साजिश के तहत खड़ा किया गया है। वहीं विरोधी पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।
फिलहाल अदालत के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। 27 मई की सुनवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। माना जा रहा है कि उस दिन कोर्ट की टिप्पणी और फैसला आने वाले दिनों में इस पूरे मामले को नया मोड़ दे सकता है। गोपालगंज से लेकर पटना तक इस प्रकरण की चर्चा तेज है और सभी पक्ष कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।